सबसे ज्यादा कीमत लगाकर टाटा संस ने जीती एअर इंडिया की बोली, 68 साल बाद हुई घर वापसी
नई दिल्ली। घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए टाटा संस ने बोली जीत ली है। बोली जीतने के बाद अब सरकारी एयरलाइन एअर इंडिया टाटा समूह के नियंत्रण में चली जाएगी। टाटा समूह ने एअर इंडिया की बिक्री प्रक्रिया में सबसे ज्यादा बोली लगाकर इसपर अपना कब्जा कर लिया है। एअर इंडिया के लिए ये बोली टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट के अजय सिंह ने लगाई। यहां बता दें कि ये दूसरा मौका है जब सरकार एअर इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही है। इससे पहले सरकार की तरफ से साल 2018 में कंपनी की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की थी लेकिन उसे उस वक्क कोई रिस्पांस नहीं मिला था। सूत्रों की मानें तो दिसंबर 2021 तक एअर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी ऐसे में ये दिसंबर तक टाटा सन्स को कंपनी मिल सकती है। सरकार ने Air India के लिए फाइनेंशियल बिड्स मंगवाई थीं। ये सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा भी है।
टाटा ग्रुप ने ही की थी शुरुआत
साल 1932 में एअर इंडिया ने ही टाटा ग्रुप की शुरूआत की थी। टाटा समूह के जे. आर. डी. टाटा ने इसकी शुरुआत की थी जो कि खुद भी एक बेहद कुशल पायलट थे।
ऐसे बनी सरकारी कंपनी
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब देश (भारत) से सामान्य हवाई सेवा की शुरुआत हुई तो इसका नाम Air India रखकर इसे एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बना दिया गया। साल 1947 में जब देश आज़ाद हुआ तो इसके बाद एक राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में भारत सरकार ने एअर इंडिया में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण कर ली। भारत सरकार ने इसके बाद 1953 में एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास किया और टाटा समूह से इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली। ऐसे Air India पूरी तरह से एक सरकारी कंपनी में तब्दील हो गई।
