April 24, 2026

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मुस्लिमों के पूर्वज नहीं खाते थे बीफ, मैं उन्हें इस परंपरा की याद दिलाता हूं: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा

नई दिल्ली। यूं तो हिंदुस्तान की सियासत में कोई न कोई सियासी सूरमा हमेशा किसी ने किसी मसले पर अपने ख्यालात साझा कर सुर्खियों में रहने की जुगत में लगा ही रहता है, लेकिन जब कोई सियासी सूरमा चुनावी मौसम में किसी मसले पर बेबाकी से अपनी राय दे जाए, तो यकीनन उसका चर्चा में रहना लाजिमी है। जी हां…इस बीच कुछ ऐसे ही ज्वलंत मुद्दों पर आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा ने मीडिया से मुखातिब होने के क्रम में कुछ ऐसे ही बयान देकर सुर्खियों में आ गए हैं। आइए, जानते हैं कि आखिर उन्होंने क्या कहा ? यूं तो हिमंता बिस्वा ने मीडिया से मुखातिब होने के क्रम में कई मसलों पर अपनी राय रखी, लेकिन मुस्लिमों और बीफ के संदर्भ में दिए अपने बेबाक राय से वे सुर्खियों की गलियों को गुलजार ही कर गए। उन्होंने मुस्लिमों का जिक्र कर कहा कि अगर मैं किसी मुस्लिम को यह याद दिलाऊं कि आपके पूर्वज कालांतर में बीफ नहीं खाते थे, तो आप ही बताइए, इसमें क्या गलत है? उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में सभी मस्लिमों के पूर्वज हिंदू थे।

इससे साफ जाहिर होता है कि वे बीफ नहीं खाते थे, जब उन्होंने धर्म परिवर्तन किया होगा, तभी उन्होंने बीफ खाना शुरू किया होगा। अब ऐसे में अगर मैं किसी मुस्लिम को उसके मूल तत्व व सांस्कृति का स्मरण कराऊं, तो भला इसमें क्या गुरेज है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की यही सबसे बड़ी विसंगति है कि यदि किसी मुस्लिम को उसकी मूल सांस्कृति व उसके संस्कार की याद दिलाई जाती है, तो कुछ तथाकथित बुद्धजीवि यह कहना शुरू कर देते हैं कि भारत का संविधान खतरे में है। धर्मनिरपेक्षता खतरे में है, बल्कि ऐसा कुछ भी नहीं है। बता दें कि हिमंता बिस्वा ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब कुछ माह बाद ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ।ऐसे में उनके इस बयान का क्या कुछ असर पड़ता है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।

वहीं, हिमंता के इस बयान पर जब कुछ लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया में यह कहा कि आखिर आप कौन होते हैं ये तय करने वाले आप कौन होते हैं कि कौन क्या खाएगा और क्या नहीं खाएगा। इस पर सीएम ने कहा कि देखिए हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या यही है कि जब हमें उसे उसकी मूल संस्कृति व संस्कार याद दिलाते हैं, तो कुछ लोग खिन्न हो जाते हैं। इसके अलावा सीएम ने बीफ समेत कई मसलों पर राय रखी। उन्होंने प्रदेश में अवैध रूप से रहे लोगों के खिलाफ प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र कर कहा कि हम बिना प्रमाणपत्र के प्रदेश में रह रहे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले भी  असम में घसुपैठियों का मसला सुर्खियों में रहा है। ऐसे में अब आने वाले चुनाव में ये मसले प्रदेश के सियासी समीकरण को तय करने में क्या भमिका निभाते हैं। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।

बता दें कि चंद माह बाद असम समेत कुल पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर व असम शामिल है। अभी हाल ही इस चुनावी राज्यों को लेकर एबीपी-सी वोटर का सर्वे सामने आया है, जिसमें पंजाब को छोड़कर सभी राज्यों में बीजेपी का विजयी पताका लहराने की बात कही गई है। वहीं, कांग्रेस का तो पूरा सूपड़ा साफ होने की बात कही गई है। इसके अलावा गोवा में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की बात कही गई है। अब ऐसे में आगामी चुनावों में ये सर्वे कहां तक चरितार्थ होते हैं। यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है।

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