वक्फ संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट से मंजूरी, मार्च में संसद के सत्र के दौरान पेश होने की संभावना
नई दिल्ली। 10 मार्च से संसद के बजट सत्र का दूसरा भाग शुरू होने जा रहा है। इस दौरान एक बार फिर जोरदार हंगामा मचने के आसार दिखने लगे हैं। खबरों के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने वक्फ संशोधन बिल को हरी झंडी दिखा दी है। मोदी सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू वक्फ संशोधन बिल को मार्च के महीने में संसद में पास कराने के लिए पेश कर सकते हैं। जाहिर है, वक्फ संशोधन बिल का विपक्षी दल विरोध करेंगे और ऐसे में संसद में हंगामा होना तय माना जा सकता है।
वक्फ संशोधन बिल को मोदी सरकार ने अगस्त 2024 में संसद में पेश किया था। जिसके बाद जेपीसी का गठन कर इसे वहां चर्चा के लिए भेज दिया गया था। संसद की जेपीसी ने वक्फ संशोधन बिल पर मुस्लिम नेताओं, धर्मगुरुओं और समाज के सभी वर्गों से राय ली। जिसके बाद वक्फ संशोधन बिल में 14 बदलाव के पक्ष में आए सदस्यों के मतों को मान लिया गया। वहीं, विपक्ष की तरफ से जो भी संशोधन दिए गए थे, उनको बहुमत के आधार पर नहीं माना गया। इसके बाद विपक्ष ने वक्फ संशोधन बिल पर बनी जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर तानाशाही करने का आरोप लगाया था। संसद के बजट सत्र के दौरान जगदंबिका पाल ने वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में जेपीसी की रिपोर्ट सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर वक्फ संशोधन बिल में बदलाव कर उसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
वक्फ के मसले पर काफी साल से विवाद चल रहा है। दरअसल, वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपना बता देते हैं। वक्फ बोर्डों के ऐसे फैसलों को किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। ये भी सामने आया है कि तमाम सरकारी जमीनों को वक्फ बोर्डों ने अपना बताया है। इसके अलावा वक्फ बोर्डों में मुस्लिम समाज के ही तमाम वर्गों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं है। वक्फ संपत्तियों की रजिस्ट्री न होने का मसला भी जेपीसी के सामने आया था। उसी आधार पर जेपीसी ने वक्फ संशोधन बिल पर रिपोर्ट तैयार कर संसद को सौंपी थी। संसद में जेपीसी रिपोर्ट सौंपने के दौरान भी विपक्ष ने विरोध जताया था। जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि विपक्षी सदस्य रिपोर्ट में अपनी जो बात लिखवाना चाहें वो लिखा दें। इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
