Pahalgam Terror Attack: कई दिन तक रेकी और स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स की मदद, टीआरएफ आतंकियों ने इस तरह किया पहलगाम में नरसंहार
पहलगाम। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने नरसंहार करने के लिए बड़ी तैयारी की थी। प्रारंभिक जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) के आतंकियों ने पहलगाम में स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स यानी ओजीडब्ल्यू की मदद ली। ओजीडब्ल्यू के लोगों के साथ आतंकियों ने बैसरन घाटी स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की कई दिन तक रेकी की। सुरक्षा एजेंसियों को पहले इनपुट भी मिला था कि जम्मू-कश्मीर में किसी टूरिस्ट स्पॉट पर आतंकी हमला कर सकते हैं। अब सवाल ये है कि इसके बावजूद पहलगाम की बैसरन घाटी में सुरक्षा क्यों नहीं थी?
पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों के हाथ 26 लोगों की मौत और 17 के घायल होने के बाद हो रही जांच में ये भी पता चला है कि हमला करने वाले टीआरएफ आतंकियों को उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स ने हथियार भी मुहैया कराए। इसके अलावा आतंकियों को अन्य सुविधाएं भी दी गईं। अब एक तरफ सेना, केंद्रीय बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान आतंकियों की तलाश में जुटे हैं। जबकि, खुफिया एजेंसियां पहलगाम और आसपास टीआरएफ आतंकियों को मदद पहुंचाने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स की पहचान में जुटी हैं। कुल मिलाकर आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाने की तैयारी भी की जा रही है। जम्मू-कश्मीर में पहले भी सेना और पुलिस ने आतंकी संगठनों के दर्जनों ओवरग्राउंड वर्कर्स को पकड़ा है। इनके पास से अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए जाते रहे हैं।
पहलगाम में आम नागरिकों पर हुआ सबसे भीषण आतंकी हमला सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती है। उनको इस इलाके में हर आतंकी को मार गिराना है और एक-एक ओवरग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार करना है। इसकी वजह अमरनाथ यात्रा है। जम्मू-कश्मीर में कुछ दिन बाद ही अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है। अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु पहलगाम को बेस कैंप बनाते हुए आगे जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जम्मू-कश्मीर की सरकार और सुरक्षाबलों को करने होते हैं।
