April 17, 2026

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प्रदेश में वर्तमान दौर में लगातार नए थाने व चौकियां खोले जा रहे हैं, जिन को खोलने का कारण बढ़ती आबादी के मद्देनजर सुरक्षा के लिहाज बताया जाता है, दूसरी ओर एक मुद्दा चल रहा है सरकारी स्कूलों के विलय का,अन्य मूलभूत सुविधाएं भी आबादी के अनुरूप होनी चाहिए

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रविन्द्र बंसल प्रभारी यूपी, यूके / हिंद फोकस न्यूज़   

प्रदेश में वर्तमान दौर में लगातार नए थाने व चौकियां खोले जा रहे हैं, जिन को खोलने का कारण बढ़ती आबादी के मद्देनजर सुरक्षा के लिहाज बताया जाता है, दूसरी ओर एक मुद्दा चल रहा है सरकारी स्कूलों के विलय का,अन्य मूलभूत सुविधाएं भी आबादी के अनुरूप होनी चाहिए

लखनऊ। प्रदेश की वर्तमान सरकार का ध्यान आजकल शिक्षा और चिकित्सा से ज्यादा पुलिसिंग पर है। सभी जनपदों में लगातार नए थानों व चौकियों की स्थापना की जा रही है। इसके लिए सरकार द्वारा खूब पैसा खर्च किया जा रहा है। पुलिस के लिए फंड खूब खर्च हो रहा है पैसा भी इतना मिल रहा है की कुछ भी खरीदो।

नए थाने एवं चौकियां खोलने के पीछे तर्क दिया जाता है की आबादी बढ़ रही है। यह सही है और हम भी मानते है आबादी बढ़ रही है। लेकिन आबादी बढ़ने से मतलब यह है कि अपराधी भी बढ़ रहे? अगर अपराधियों की संख्या भी प्रदेश में बढ़ रही है तो मेरा मानना है कि हमारी पुलिस व्यवस्था ठीक नहीं है इसमें सुधार लाने की जरूरत है। हो सकता है अपराधी भी बढ़े हों। जिनकी संख्या के हिसाब से थाने व चौकियां खोलनी जरूरी हों, लेकिन आबादी बढ़ने से इसका असर शिक्षा व चिकित्सा पर भी तो पड़ा है। स्कूल, कॉलेज, डिस्पेंसरी एवं हॉस्पिटलों की भी तो कमी हुई है।

सवाल यह उठता है कि इस तरफ सरकार ने कितना ध्यान दिया है? जिस तरह से थाने और चौकियों की संख्या जनपदों में बढ़ाई गई है क्या उसी अनुपात में स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल व डिस्पेंसरी आदि भी खोले गई है? आबादी बढ़ने पर क्या नए स्कूलों व अस्पतालों की जरूरत नहीं पड़ेगी? अगर लोगों की जनसंख्या बढ़ी है तो उसी के हिसाब से उन्हें सभी बुनियादी सुविधा चाहिए होती हैं। मात्र थाने और चौकियों की संख्या बढ़ने भर से लोगों की मूलभूत ज़रूरतें पूरी नहीं हो जाती? सरकार को जिस अनुपात में आबादी बढ़ी उसी अनुपात में बुनियादी सुविधाएं भी नागरिकों को देनी चाहिए। मात्र थानों व चौकियां की संख्या बढ़कर बढ़ती आबादी की बुनियादी जरूरत को पूरा नहीं किया जा सकता। शिक्षा, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं की ओर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। दूसरी तरफ आजकल सरकारी स्कूलों के विलय का मुद्दा भी काफी गर्मा रहा है।

प्रदेश के नागरिकों का मानना है कि जब सरकार थाने व चौकियों पर इतना बजट बड़ा खर्च कर सकती है तो सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने पर क्यों नहीं ? क्या सरकारी स्कूलों का विलय करना ही विकल्प है? शिक्षा व्यक्ति का मौलिक अधिकार है स्कूलों की दशा सुधारने के लिए भी सरकार को कम करना चाहिए। निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़कर उनका भविष्य सुधारने की स्थिति प्रदेश के गरीबी रेखा में जी रहे अधिकांश नागरिकों के बूते से बाहर की बात है। इसी तरह निजी अस्पतालों में इलाज करना भी आम लोगों की हैसियत से बाहर है। इलाज कराने व अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में बहुत से लोग अपनी जमीन व मकान तक गिरवी रखने पड़ जाते हैं। सरकार को इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

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