April 24, 2026

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मुंबई में 2006 में लोकल ट्रेनों में धमाके के मामले के सभी आरोपियों को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूत न होने पर किया बरी, 189 लोगों ने गंवाई थी जान

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए साल 2006 में मुंबई के लोकल ट्रेनों में हुए बम धमाका मामले में 12 में से 11 आरोपियों को बरी कर दिया। एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है। ट्रायल कोर्ट ने मुंबई ट्रेन धमाका मामले में सभी को दोषी ठहराया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि इन सबके खिलाफ पुलिस ने जो सबूत पेश किए, वे भरोसे के लायक नहीं थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी को बरी करने का आदेश देते हुए ये भी कहा कि ट्रेनों में बम धमाके में कई लोगों की गवाही पर भी उसे शक हुआ। मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके होने से 189 लोगों की जान गई थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट का ये फैसला घटना के 19 साल बाद आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस ने बम धमाके में इस्तेमाल आरडीएक्स और अन्य चीजों की के बारे में पुख्ता वैज्ञानिक सबूत नहीं दिए। कोर्ट ने ये भी कहा कि आरोपियों से जबरन पूछताछ कर पुलिस ने बयान लिए और ये भी कानून के तहत मान्य नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम बात ये भी कही कि ट्रेनों में बम धमाका मामले के कई गवाह पहले चुप रहे और फिर अचानक आरोपियों की पहचान की। कोर्ट ने इसे असामान्य बताया। साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की ओर से पेश कई गवाहों पर ये कहते हुए सवाल उठाया कि वे पहले भी ऐसे ही मामलों में कोर्ट में पेश हो चुके हैं। इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।

इस मामले के सभी आरोपी अमरावती, नासिक, पुणे और नागपुर की जेलों में हैं। सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद इनकी रिहाई अब तय मानी जा रही है। ये भी माना जा रहा है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को महाराष्ट्र की सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। मुंबई में 11 जुलाई 2006 को लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के भीतर 7 धमाके हुए थे। धमाकों में 189 की मौत के अलावा 800 से ज्यादा यात्री घायल हुए थे। महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 15 अन्य फरार घोषित हुए थे। फरार आरोपियों में से ज्यादातर के पाकिस्तान में होने की बात कही गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अन्य को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था।

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