Monsoon Session : ऑपरेशन सिंदूर, नक्सलवाद, भारत की अर्थव्यवस्था, मानसून सत्र से पहले अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने बहुत से मुद्दों का किया जिक्र
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी, नक्सलवाद से मुक्ति, भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था समेत तमाम मुद्दों का जिक्र किया। मोदी ने कहा, यह मानसून सत्र एक विजयोत्सव के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। पूरी दुनिया ने भारत की सैन्य शक्ति का, सामर्थ्य का रूप देखा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की सेना ने जो लक्ष्य निर्धारित किया उसमें 100 प्रतिशत सफलता पाई। आतंकियों के आकाओं के घर में जाकर मात्र 22 मिनट के अंदर ऑपेरशन सिंदूर के तहत उसको जमींदोज कर दिया गया। हमारी सैन्य शक्ति ने बहुत ही कम समय में सिद्ध करके दिखा और और इसमें मेड इन इंडिया, सैन्य शक्ति का यह नया स्वरूप इसमें भी दुनिया बहुत आकर्षित हुई है। मुझे विश्वास है कि जब सदन इस विजयोत्सव को एक स्वर में विजय के भाव से इस सत्र के दर्मियान उन ओजस्वी, तेजस्वी भावनाओं को प्रकट करेगा तो भारत की सैन्य शक्ति को बल और प्रोत्साहन मिलेगा।
मोदी ने कहा, ये दशक में हम देख सकते हैं कि शांति और प्रगति कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते गए। कदम-कदम पर प्रगति का एहसास हम करते रहे हैं। देश कई प्रकार की हिंसक वारदातों का शिकार रहा है, देश आजाद हुआ हम तब से इस समस्या को झेल रहे हैं, चाहे आतंकवाद हो या नक्सलवाद। लेकिन आज नक्सलवाद का, माओवाद का दायरा बहुत तेजी से सिकुड़ रहा है। माओवाद को जड़ से उखाड़ने के संकल्प के साथ देश के सुरक्षाबल नए आत्मविश्वास से तेज गति से सफलता की ओर कदम रख रहे हैं। मैं गर्व से कह सकता हूं कि देश में सैकड़ों जिले नक्सल की चपेट से निकल कर आज मुक्ति की सांस ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री बोले, मैं गर्व से कह सकता हूं कि सैंकड़ों जिले नक्सल की चपेट से निकलकर आज मुक्ति की सांस ले रहे हैं। हमें गर्व है कि बम, बंदूक और पिस्तौल के सामने हमारे देश का संविधान जीत रहा है। ‘लाल गलियारे’ ‘हरित विकास क्षेत्रों’ में बदल रहे हैं। यह संसद के प्रत्येक सदस्य के लिए गर्व का क्षण है। मोदी ने कहा, जब 2014 में आप सभी ने हमें जिम्मेदारी दी थी, हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में दसवें नंबर पर थे। आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। 2014 से पहले देश में एक समय ऐसा भी था जब मुद्रास्फीति की दर दहाई अंक में थी। आज, यह दर घटकर लगभग दो प्रतिशत रह गई है, जिससे देश के आम लोगों के जीवन में राहत और सुविधा आई है।
