बिहार में कल तक होगा वोटरों का विशेष पुनरीक्षण, जानिए कितने लाख नाम कटने के आसार
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग वोटरों का विशेष गहन पुनरीक्षण करा रहा है। चुनाव आयोग ने बिहार के वोटरों के विशेष पुनरीक्षण से संबंधित ताजा आंकड़े जारी किए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक बुधवार तक बिहार के 98.01 वोटरों से विशेष पुनरीक्षण के तहत फॉर्म लिए जा चुके हैं। इनमें से 90.89 फीसदी फॉर्म को डिजिटाइज किया जा चुका है। चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार में अभी 15 लाख वोटरों से विशेष पुनरीक्षण के फॉर्म उसे नहीं मिले हैं। बिहार में कुल 78969844 वोटर हैं। बिहार में चुनाव आयोग 25 जुलाई तक वोटरों का विशेष पुनरीक्षण अभियान जारी रखेगा।
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 से बिहार में वोटरों का विशेष पुनरीक्षण शुरू किया था। तबसे लेकर 23 जुलाई तक उसने 20 लाख मृत वोटरों की पहचान की है। चुनाव आयोग ने बताया है कि बिहार के 28 लाख वोटर स्थायी तौर पर स्थान बदल चुके हैं। यानी ये अब बिहार में नहीं रहते। विशेष पुनरीक्षण में पता चला है कि 7 लाख वोटरों का एक से ज्यादा चुनाव क्षेत्रों में नाम है। वहीं, 1 लाख वोटरों का अभी पता नहीं चल सका है। चुनाव आयोग ने बताया है कि उसे 15 लाख वोटरों से विशेष पुनरीक्षण के भरे हुए फॉर्म अभी नहीं मिले हैं।
चुनाव आयोग की ओर से बिहार में वोटरों का विशेष पुनरीक्षण किए जाने का आरजेडी और कांग्रेस समेत विपक्षी दल जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ये वोट काट देने की साजिश है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो चुकी है और फिर 28 जुलाई को होनी है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 के तहत उसे वोटरों की नागरिकता चेक करने का अधिकार है। ऐसे में विपक्षी दल सिर्फ विरोध प्रदर्शन और संसद के साथ ही बिहार विधानसभा में मामले को उठाकर हंगामा कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण पर चर्चा के लिए संसद में नोटिस दिया है, लेकिन सरकार का मानना है कि ये काम चुनाव आयोग करा रहा है और सरकार उसके काम पर कुछ नहीं कह सकती। ऐसे में इस पर संसद में चर्चा होना फिलहाल संभव नहीं लग रहा है।
