अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों, अधिकारियों के परिसरों पर ईडी का छापा, जानिए क्यों हुआ एक्शन?
नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापा मारा है। मुंबई में कंपनियों से जुड़े कई स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई चल रही है। कंपनियों के कई वरिष्ठ अधिकारियों के परिसरों में भी ईडी की तलाशी जारी है। राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए), बैंक ऑफ बड़ौदा तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज दो एफआईआर के आधार पर ईडी ने यह एक्शन लिया है। सार्वजनिक धन की हेराफेरी की सुनियोजित साजिश के सबूत ईडी के पास हैं, ऐसा उसने दावा किया है।
ईडी को इस बात का शक है कि साल 2017 से 2019 के बीच लगभग 3,000 करोड़ रुपये का ऋण जो यश बैंक से लिया गया था, उसकी अवैध तरीके से हेराफेरी और दुरुपयोग किया गया। ईडी अधिकारियों का कहना है कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों को ऋण वितरण से पहले बैंक के प्रमोटरों से जुड़ी संस्थाओं को धनराशि का हस्तांतरण किया गया था। इसके चलते यस बैंक के पूर्व प्रमोटरों से जुड़े रिश्वतखोरी के एंगल की पड़ताल भी हो रही है। वित्त वर्ष 2017-18 में अनिल अंबानी कंपनी का कॉरपोरेट ऋण 3,742.60 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670.80 करोड़ रुपये हो गया था।
आपको बता दें कि हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसके प्रमोटर-निदेशक अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित किया था। एसबीआई की ओर से अनिल अंबानी की कंपनी को दिसंबर 2023, मार्च 2024 और सितंबर 2024 में कारण बताओ नोटिस भेजे गए थे। इन नोटिस पर कंपनी की ओर से भेजे गए उत्तर की समीक्षा के बाद स्टेट बैंक की ओर से कहा गया था कि कंपनी ने अपने लोन की शर्तों का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं कंपनी ने अपने अकाउंट्स के संचालन में अनियमितताओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी।
