ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सीएजी (कैग) रिपोर्ट और नोएडा मुआवजा वितरण मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी नोएडा, ग्रेटर नोएडा में पंचायत/नगर निगम गठन के लिए बनेंगे मजबूत कानूनी आधार
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रविन्द्र बंसल प्रभारी यूपी, यूके / हिंद फोकस न्यूज़
कैग रिपोर्ट और माननीय उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी से नोएडा, ग्रेटर नोएडा में पंचायत पुनर्गठन की जगी उम्मीद
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सीएजी (कैग) रिपोर्ट और नोएडा मुआवजा वितरण मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी नोएडा, ग्रेटर नोएडा में पंचायत/नगर निगम गठन के लिए बनेंगे मजबूत कानूनी आधार
-कर्मवीर नागर प्रमुख
गौतमबुद्धनगर। जनपद के यीडा, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र की 288 ग्राम पंचायतों को औद्योगिक नगरी क्षेत्र घोषित करने के बाद इन पंचायतों में सन् 2015 के बाद का पुनर्गठन बंद कर दिया गया था। पंचायत चुनावों में आपसी रंजिश बढ़ने और प्राधिकरणों द्वारा गांवों का सुनियोजित विकास किए जाने का सपना संजोने की वजह से पंचायत पुनर्गठन बंद होने पर ग्रामीणों ने तत्समय राहत की सांस ली थी। लेकिन तीनों प्राधिकरणों द्वारा गांवों के विकास की अनदेखी करने की वजह से पिछले कई वर्षों से ग्रामीणों द्वारा पंचायत पुनर्गठन की मांग उठती रही है। पंचायत पुनर्गठन की मांग पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार की चुप्पी की वजह से पंचायत पुनर्गठन हेतु जनहित याचिकाएं भी न्यायालयों में दायर की गई हैं। लेकिन कल की दो खबरों ने पंचायत पुनर्गठन की उम्मीद जगा दी है। जिसमें पहली तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कामकाज के विषय में कैग की वह रिपोर्ट है जिसने स्पष्ट खुलासा कर दिया है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में 48 फीसदी औद्योगिक परियोजनाएं अधूरी रह गई है जिस वजह से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य ही फेल हो गया है नियमों के विपरीत औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने की जगह ग्रेटर नोएडा को आवासीय टाउनशिप के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया है।
इसके अतिरिक्त नोएडा प्राधिकरण द्वारा मुआवजा वितरण के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय आदेश में की गई टिप्पणी की खबर है जिसमें सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्या बागची की खंड पीठ द्वारा सुनाए गई फैसले की एक टिप्पणी में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोएडा अथॉरिटी को महानगर परिषद में बदलने पर विचार करने यानी कि नगर निगम गठन करने का भी निर्देश दिया है ताकि पारदर्शिता और जवाब देही सुनिश्चित हो सके।
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय में नोएडा में नगर निगम के गठन हेतु दिया गया निर्देश और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कैग रिपोर्ट में औद्योगिक प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य फेल होने का जिक्र नोएडा, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पंचायत पुनर्गठन की कानूनी आधार को मजबूत करेगा। अगर इस मामले को स्थानीय जनप्रतिनिधि सरकार के समक्ष उठाते हैं तो कानूनी लड़ाई लड़ने की आवश्यकता नहीं होगी। क्योंकि *पंचायत पुनर्गठन के संबंध में कर्मवीर नागर बनाम सरकार नामक एक जनहित याचिका पहले से ही दायर की हुई है।* लेकिन जो भी हो इन दो खबरों ने पंचायत पुनर्गठन की उम्मीद जरूर जगा दी है।
