‘विवाहित महिला शादी के झूठे वादे पर रेप का दावा नहीं कर सकती’, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने अहम फैसले में कहा है कि विवाहित महिला किसी से संबंध बनाती है, तो वो शादी के झूठे वादे पर रेप का दावा नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने ऐसे मामले में सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को दोषमुक्त कर दिया। जस्टिस नागपाल ने कहा कि विवाहित महिला की ओर से शादी के वादे पर संबंध बनाने की सहमति देना अनैतिकता है। उन्होंने ऐसे संबंध को विवाह संस्था की अवहेलना भी बताया। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक शख्स ने याचिका दी थी। इस शख्स को 2016 में रेप के मामले में 9 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
संबंधित मामले में महिला का दावा था कि उसने शादी का वादा किए जाने पर शख्स से संबंध बनाए। महिला की दलील पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने फैसले में कहा कि शिकायत करने वाली महिला भोली-भाली, मासूम और शर्मीली नहीं थी। जो अपने फैसले से होने वाले नतीजे का आकलन नहीं कर सकती थी। कोर्ट ने कहा कि महिला वयस्क, 2 बच्चों की मां और दोषी ठहराए गए शख्स से उम्र में 10 साल बड़ी थी। कोर्ट ने कहा कि महिला का दावा पहली नजर में झूठा है। क्योंकि उसने ये भी माना है कि वो ससुराल में रह रही थी और अपने पति के खिलाफ तलाक या कोई और केस भी नहीं किया था।
कोर्ट ने कहा कि अपील करने वाले की ओर से साल 2012-2013 में महिला से 50-60 बार संबंध बनाने के बयान में तारीखों और अन्य जानकारी का अभाव है। महिला ने माना है कि ये संबंध उसके ससुराल में ही बने थे। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि साबित होता है कि महिला अपनी सहमति से दो साल या उससे अधिक वक्त तक याचिका दाखिल करने वाले से संबंध में थी। वो इस दौरान पति के साथ ही रही। कोर्ट ने कहा कि आरोपी इस महिला को शादी का वादा कर अंतरंग संबंध बनाने के लिए प्रेरित करने की स्थिति में भी नहीं था। वो भी उसके ससुराल में, जहां अन्य लोग और बच्चे भी मौजूद थे। कोर्ट ने कहा कि लगता है कि संबंध उस वक्त तक बने रहे, जब तक कि महिला को ये नहीं पता चला कि याचिका करने वाले ने दूसरी महिला से शादी कर ली है। हाईकोर्ट ने कहा कि ये सहमति से बने संबंध बिगड़ने का केस था और बदला लेने के लिए आपराधिक कानून लागू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
