जापान की टेक्नोलॉजी और भारत का टैलेंट मिलकर…टोक्यो में पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया मित्रता का संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज टोक्यो में जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ मुलाकात की। भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जापान की टेक्नोलॉजी और भारत का टैलेंट मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं। भारत तेजी से अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है और 2047 तक हमने 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है। सोलर सेल्स हो ग्रीन हाइड्रोजन साझेदारी की अपार संभावनाएं हैं। भारत और जापान के बीच ज्वाइंट क्रेडिट मैकेनिजम पर समझौता हुआ है। इसका लाभ उठाकर क्लीन और ग्रीन फ्यूचर के निर्माण में सहयोग किया जा सकता है।
मोदी ने कहा, जापान की उत्कृष्टता और भारत का पैमाना एक आदर्श साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं। भारत का स्किल्ड युवा टैलेंट वैश्विक जरूरतें पूरी करने की क्षमता रखता है। इसका लाभ जापान भी उठा सकता है। आप भारतीय टैलेंट को जापानी भाषा और सॉफ्ट स्किल्स में ट्रेनिंग दें और मिलकर जापान के लिए तैयार कार्यबल तैयार करें। यह कुशल कार्यबल वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा करेगा भारत और जापान की साझेदारी रणनीतिक और स्मार्ट है। हमने साझा हितों को साझा समृद्धि में बदल दिया है। भारत जापानी व्यवसायों के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड है। हम सब मिलकर स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए एशियाई सदी को आकार देंगे। मोदी ने आगे कहा, पिछले दशक में भारत ने अगली पीढ़ी की गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व प्रगति की है। हमारी बंदरगाह क्षमता दोगुनी हो गई है। जापान के सहयोग से मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर काम चल रहा है लेकिन हमारी यात्रा यहीं नहीं रुकती।
वहीं इस अवसर पर जापान प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा बोले, जापान की उन्नत तकनीक और भारत की उत्कृष्ट प्रतिभा एक-दूसरे की पूरक हैं, जिससे हमारे आर्थिक संबंधों का नाटकीय विस्तार हो रहा है। कई जापानी कंपनियां मेक इन इंडिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज हमारी कंपनियों के बीच नए सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर, भारत में अपने निवेश को आगे बढ़ाने और सहयोग को मजबूत करने के लिए जापान की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हम दोनों देशों के इर्द-गिर्द केंद्रित अपनी आपूर्ति श्रृंखला का लगातार निर्माण कर रहे हैं… मैं चाहता हूं कि भविष्य में हमारा द्विपक्षीय सहयोग निरंतर विकसित होता रहे।
