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पंजाब में बाढ़: बरसात का कहर, गाँव-गाँव तबाही — प्रशासन ने तेज़ किए राहत व बचाव

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हिंद फोकस न्यूज़ 

पंजाब में बाढ़: बरसात का कहर, गाँव-गाँव तबाही — प्रशासन ने तेज़ किए राहत व बचाव

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चंडीगढ़, 05 सितम्बर 2025
रिपोर्ट — रविन्द्र बंसल विशेष संवाददाता

लगातार हो रही भारी बरसात और नदियों के उफान ने पंजाब के गाँव-गाँव को जलमग्न कर दिया है। खेत-खलिहान, घर-बार और पशुधन डूबने से आमजन त्राहिमाम कर रहे हैं। सैकड़ों गाँव प्रभावित हैं, लाखों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं। सरकार और केंद्रीय एजेंसियों ने राहत व बचाव कार्य तेज़ किए हैं, लेकिन तबाही का मंजर इतना बड़ा है कि चुनौतियाँ अब भी सामने खड़ी हैं।

तबाही का मंजर

पंजाब के कई ज़िले — गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोज़पुर, कपूरथला, लुधियाना और होशियारपुर — बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं।

गाँव डूबे: 1,000 से अधिक गाँव पानी से घिर गए हैं।

किसानों की मुसीबत: लाखों एकड़ धान, मक्का और गन्ने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।

मकान और सड़कें: सैकड़ों मकान जमींदोज़ हो गए, सड़कें और पुल टूटने से आवागमन ठप है।

लोगों की परेशानी: विस्थापित लोगों को पीने के पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी झेलनी पड़ रही है।

पीड़ितों की पीड़ा

राहत शिविरों में ठहरे ग्रामीणों का कहना है कि

“न घर बचा, न खेत — बस भगवान का सहारा है।”

बच्चे और बुज़ुर्ग गंदे पानी में बीमार हो रहे हैं।

मवेशियों के लिए चारा और सुरक्षित ठिकाने की भारी किल्लत है।

राहत और बचाव कार्य

राज्य सरकार: प्रभावित जिलों में 500 से अधिक राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। दवाइयाँ, खाने का पैकेट और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

केंद्र सरकार: एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 25 से अधिक टीमें नावों और हेलीकॉप्टर की मदद से लोगों को सुरक्षित निकाल रही हैं।

सेना और वायुसेना: बाढ़ग्रस्त इलाकों में एयरलिफ्ट कर फंसे लोगों को बचाया जा रहा है और राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है।

स्वयंसेवी संस्थाएँ: गुरुद्वारों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने भोजन और कपड़े पहुँचाने का बीड़ा उठाया है।

सरकार के आधिकारिक बयान

मुख्यमंत्री ने कहा —
“बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव मदद दी जाएगी। प्रभावित किसानों को मुआवज़ा मिलेगा और मकान गंवाने वालों को पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा।”

गृह मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि केंद्र सरकार ने आपदा राहत कोष से पंजाब को आपातकालीन राशि जारी कर दी है और ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका

सिंचाई विभाग लगातार नदियों के जलस्तर पर नज़र रख रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल चिकित्सा दल तैनात किए हैं।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन बाढ़ग्रस्त इलाकों की निगरानी और लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुँचाने में जुटा है।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ

नदियों का जलस्तर अब भी ख़तरे के निशान के आसपास बना हुआ है।

मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में फिर से भारी बरसात की संभावना जताई है।

विस्थापितों के पुनर्वास, बीमारियों की रोकथाम और किसानों को आर्थिक राहत देना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष

पंजाब में आई इस बाढ़ ने न केवल लोगों के घर और फसलें उजाड़ दी हैं बल्कि भविष्य के लिए जल-प्रबंधन, नदियों के किनारों की सुरक्षा और आपदा-तैयारी की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। तत्काल राहत के साथ-साथ लंबे समय तक टिकाऊ समाधान की ज़रूरत है ताकि ऐसी तबाही दोबारा लोगों का जीवन न उजाड़े।

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