मुनंबम जमीन विवाद में केरल हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के कदम को हड़पने की रणनीति कहा
तिरुवनंतपुरम। वक्फ बोर्डों की ओर से संपत्ति हासिल किए जाने पर देश में कई जगह विवाद खड़े हुए हैं। ऐसा ही विवाद केरल के मुनंबम में भी है। यहां एक व्यक्ति की ओर से फारुख कॉलेज को संपत्ति दी गई। इस संपत्ति पर केरल वक्फ बोर्ड ने दावा जता दिया। जबकि, फॉरुख कॉलेज की ओर से जमीन पर बसे लोगों को इसकी बिक्री की जा चुकी थी। अब केरल हाईकोर्ट ने मुनंबम में इस जमन को वक्फ संपत्ति के तौर पर अधिसूचित करने पर वक्फ बोर्ड की आलोचना की है।
केरल हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस श्याम कुमार वीएम की बेंच ने एकल बेंच के आदेश को खारिज करते हुए ये टिप्पणी तक की कि इस तरह तो एक दिन ताजमहल, लाल किला, केरल विधानसभा और यहां तक कि केरल हाईकोर्ट को भी वक्फ संपत्ति घोषित किया जा सकता है! हाइकोर्ट की बेंच ने कहा कि संपत्ति को फारुख कॉलेज को 1950 में दिए जाने संबंधी विलेख उपहार था। ये वक्फ विलेख नहीं था। केरल हाईकोर्ट ने कहा कि जमीन को वक्फ के तौर पर अधिसूचित करना केरल वक्फ बोर्ड की ओर से हड़पने की रणनीति के अलावा कुछ और नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केरल सरकार इस मामले में राज्य के वक्फ बोर्ड के घोषणा आदेशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
पहले एकल जज की बेंच ने मुनंबर में उक्त जमीन को वक्फ घोषित करने के बाद बेदखली का सामना कर रहे करीब 600 परिवारों के हक की जांच के लिए राज्य सरकार की ओर से आयोग बनाए जाने के फैसले को रद्द कर दिया था। फारुख कॉलेज को दान में मिली जमीन पहले 400 एकड़ से ज्यादा थी। समुद्र के कटाव के कारण ये करीब 350 एकड़ रह गई है। फॉरुख कॉलेज को जमीन दिए जाने से पहले से ही यहां सैकड़ों परिवार रह रहे थे। फॉरुख कॉलेज ने इनको ही जमीन बेच दी थी, लेकिन अचानक केरल वक्फ बोर्ड ने मुनंबम की इस जमीन पर अपना हक जता दिया।
