पश्चिम बंगाल के 32,000 प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत, बहाल होगी नौकरी, कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का फैसला पलटा
नई दिल्ली। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 32,000 प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कोर्ट ने 2023 के शिक्षक भर्ती फैसले को पलटते हुए नियुक्तियों को बहाल करने का आदेश दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतब्रतकुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की सिंगल बेंच के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट डिवीजन बेंच ने अपने आज के आदेश में कहा कि 9 साल की सेवा के बाद नौकरी समाप्त होने से प्राथमिक शिक्षकों और उनके परिवारों पर गहरा असर पड़ेगा।
यह पूरा मामला साल 2014 में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) के जरिए 42,500 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा था कि बहुत से कम रैंक वाले उम्मीदवारों को पैसे लेकर नियुक्ति दी गई। इसके बाद जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का हवाला देते हुए 32 हजार शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द कर दी थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की नौकरी रद्द किए जाने के फैसले पर स्टे लगाते हुए इस केस को दोबारा हाईकोर्ट के पास भेज दिया था।
वहीं प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, हम फैसले का सम्मान करते हैं, मैं नौकरीपेशा लोगों को आश्वस्त करती हूं कि वे डरें नहीं। मेरा किसी के साथ कोई विरोध नहीं है, और न्यायाधीश अपना फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन बच्चों की नौकरियां छीनकर उनका भविष्य खतरे में डालना उचित नहीं है। वहीं पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने ट्वीट करते हुए लिखा, आज माननीय हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को बधाई। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया गया है। 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी पूरी तरह से सुरक्षित है। शिक्षकों को भी बधाई। सच की जीत हुई है।
