पश्चिम बंगाल एसआईआर में मुस्लिम बहुल इलाकों में कम और हिंदी भाषी व मतुआ बहुल इलाकों में सबसे ज्यादा कटे नाम
कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है। चुनाव आयोग की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक अब पश्चिम बंगाल में 7.08 करोड़ वोटर के नाम रह गए हैं। जबकि, एसआईआर से पहले पश्चिम बंगाल में वोटरों की संख्या 7.66 करोड़ थी। यानी 58 लाख से ज्यादा वोटर के नाम पश्चिम बंगाल में काटे गए हैं। अब द इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने बताया है कि पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा हिंदी भाषी और मतुआ वोटरों के नाम कटे हैं। जबकि, पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में कम वोटरों के नाम काटे गए हैं।
चुनाव आयोग की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक कोलकाता और उससे सटे हिंदी भाषी वोटर बहुल इलाके में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। कोलकाता उत्तर में 25.92 फीसदी वोटरों के नाम कटे हैं। कोलकाता दक्षिण में 23.82 फीसदी वोटरों का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है। इसके अलावा हिंदी भाषी बहुल जोड़ासांको में 36.66 फीसदी, चौरंगी में 35.45 फीसदी, ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर 21.55 फीसदी, कोलकाता पोर्ट में 26.09 फीसदी, बैरकपुर में 19.01 फीसदी, आसनसोल उत्तर में 14,71 फीसदी और आसनसोल दक्षिण में 13.68 फीसदी वोटरों के नाम कटे हैं। ये सभी हिंदी भाषी बहुल इलाके रहे हैं।
इसके अलावा चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद मतुआ बहुल दक्षिण 24 परगना के कसबा और सोनारपुर दक्षिण में भी काफी वोटरों के नाम काटे हैं। कसबा में 17.95 फीसदी और सोनारपुर दक्षिण में 11.29 फीसदी वोटरों के नाम कटे हैं। जबकि, उत्तर 24 परगना के बनगांव उत्तर में 9.71 फीसदी वोटरों के नाम कटे हैं। पश्चिम बंगाल में बसे हिंदी भाषी और मतुआ समुदाय को बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है।
सवाल ये है कि पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में क्या इससे ममता बनर्जी की टीएमसी को फायदा और बीजेपी को नुकसान होगा? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी तीन बार से सरकार बना रही है। ममता बनर्जी का इरादा पश्चिम बंगाल विधानसभा का अगला चुनाव जीतकर फिर सरकार बनाने का है। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने इस बार अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को पश्चिम बंगाल से ममता की टीएमसी को उखाड़ फेंकने का टास्क दिया है।
