बिहार में जमीन की रजिस्ट्री करवाने से पहले जान लीजिए नया नियम, फ्रॉड रोकने के लिए नीतीश सरकार ने उठाया ये अहम कदम
पटना। अगर आप बिहार में किसी जमीन की रजिस्ट्री कराने जा रहे हैं, तो इसके लिए नीतीश कुमार सरकार के नए नियम को पहले जान लीजिए। जमीन खरीदने और बेचने में कई बार फ्रॉड और विवाद होता है। जमीन की खरीद-बिक्री में फ्रॉड और विवाद को खत्म करने के लिए बिहार सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री संबंधी नए नियम लागू किए हैं। बिहार में पहली अप्रैल 2026 से रैयती जमीन की रजिस्ट्री का आवेदन करने वालों को 13 जानकारियां देनी होंगी। इस बार में बिहार के राजस्व और भूमि सुधार विभाग, मद्य निषेध विभाग और उत्पाद व निबंधन विभाग ने सभी जिलों के डीएम को चिट्ठी लिखी है।
बिहार में जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले को ई-निबंधन पोर्टल पर अकाउंट बनाना होगा। जिस जमीन की रजिस्ट्री करानी है, उसके निबंधन दफ्तर का नाम, अंचल, मौजा, थाना, खाता और खसरा संख्या, जमीन का रकबा, खरीदी जा रही जमीन की चौहद्दी, किसके नाम म्यूटेशन है, खरीदार का नाम, जमीन बेचने वाले का नाम और जमीन की श्रेणी की जानकारी देनी होगी। बिहार में जमीन की रजिस्ट्री कराने वाला आवेदक अगर चाहे, तो संबंधित जमीन के बारे में ताजा जानकारी हासिल कर सकता है। अगर वो ये विकल्प चुनेगा, तो आवेदन उस जिले के अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी को जाएगा। फिर वे जानकारी की जांच करेंगे और 10 दिन में एसएमएस से उस जमीन की ताजा जानकारी भेजेंगे।
बिहार सरकार ने ये भी तय किया है कि अगर 10 दिन में संबंधित अंचल या राजस्व अधिकारी की कोई आपत्ति या संशोधन नहीं आता, तो ये मान लिया जाएगा कि रजिस्ट्री कराने वाले आवेदक की ओर से दी गई जानकारी सही है। जिसके बाद जमीन रजिस्ट्रेशन दफ्तर को उसका आवेदन भेज दिया जाएगा। जमीन के बारे में पूरी जानकारी देने और सरकारी अफसर से ताजा जानकारी हासिल करने से फ्रॉड के मामलों पर रोक लगेगी। किसी तरह की गड़बड़ी का पता चलने पर जमीन खरीद रहे व्यक्ति को अपना पैसा बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही जमीन बेचने के नाम पर फ्रॉड करने वालों पर भी शिकंजा कस सकेगा।
