पश्चिम बंगाल एसआईआर में वोटर सिर्फ 10वीं का एडमिट कार्ड दे सकते हैं?, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर साफ की स्थिति
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में वोटरों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग और राज्य की टीएमसी सरकार में ठनी हुई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों कई अहम आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी को दिए आदेश में 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड को भी मानने का चुनाव आयोग को आदेश दिया था। इससे लग रहा था कि 10वीं बोर्ड के एडमिट कार्ड को जमा करने से तमाम लोगों को एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का मौका मिल जाएगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के एसआईआर में 10वीं के एडमिट कार्ड को मान्य करने के बारे में स्पष्टता दी है।
वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच में इस पर शंका जताई थी। नायडू ने बेंच से पूछा था कि क्या 10वीं बोर्ड का एडमिट कार्ड अकेले पहचान पत्र के तौर पर मान्य होगा? जिस पर सीजेआई की बेंच ने साफ किया कि अगर 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का एडमिट कार्ड पास सर्टिफिकेट के साथ दिया जाएगा, तभी उसे चुनाव आयोग स्वीकार करेगा। अकेले 10वीं बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड को चुनाव आयोग स्वीकार नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि 10वीं बोर्ड का एडमिट कार्ड सहायक दस्तावेज है। वो अकेला पहचान पत्र नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अपने आदेश में ये भी कहा था कि जो दस्तावेज 15 फरवरी से पहले मिल चुके हैं, लेकिन अपलोड नहीं हुए हैं, उनको ईआरओ और एईआरओ 25 फरवरी की शाम 5 बजे तक न्यायिक अधिकारियों को सौंपें।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने 80 लाख वोटरों के दावों और आपत्तियों की जांच के लिए 250 जिला जजों और सिविल जजों को लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे में ये भी कहा है कि इससे सभी के दस्तावेजों की जांच में कम से कम 80 दिन लगेंगे। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर संबंधी दावे और आपत्तियों के निपटारे के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड और ओडिशा के भी न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए कहा है। इन दोनों राज्यों के कम से कम तीन साल का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ और कनिष्ठ जजों को एसआईआर के काम में लगाया जा सकता है।
