विवादित भोजशाला का दौरा कर सकते हैं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज, नियमित सुनवाई 2 अप्रैल से
इंदौर। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला के विवाद का केस इंदौर स्थित हाईकोर्ट बेंच में चल रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को भी धार के भोजशाला मामले में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की बेंच ने इस सुनवाई में अहम कदम उठाने का संकेत दिया। बेंच का संकेत है कि नियमित सुनवाई शुरू करने से पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज खुद भोजशाला का दौरा कर सकते हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अगर ऐसा किया, तो किसी विवादित धार्मिक स्थल का जज की ओर से पहली बार निरिक्षण होगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक घंटे की सुनवाई के दौरान भोजशाला मामले में पक्षकार बनने के लिए आई सभी याचिकाओं को भी मंजूर कर लिया। बेंच ने कहा कि वो नहीं चाहती कि कोई पक्ष ये आरोप लगाए कि भोजशाला मामले में उसे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। कोर्ट ने तय किया कि अब भोजशाला मामले में 2 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई होगी। बेंच के जज की ओर से भोजशाला का दौरा करने के इरादे का संकेत देना इस मामले को और साफ तरीके से समझने का लग रहा है। भोजशाला का विवाद काफी समय से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने लंबित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला को राजा भोज ने देवी सरस्वती के मंदिर के तौर पर बनाया था। जहां शिक्षा दी जाती थी। हिंदू पक्ष का आरोप है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने भोजशाला में देवी सरस्वती के मंदिर को ध्वस्त किया।
वहीं, भोजशाला के पास कमाल मौला मस्जिद के पक्ष का दावा है कि भोजशाला की जगह कोई मंदिर नहीं था। वहां मस्जिद और दरगाह है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इन दावों की पुष्टि के लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण यानी एएसआई से भोजशाला का सर्वे भी कराया। एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला में प्राचीन मंदिर के कई हिस्से मिले हैं। वहां कई शिलालेख भी मिले हैं, जिनमें संस्कृत भाषा में लिखा है। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को तय करना है कि भोजशाला का स्वरूप क्या रहा होगा। बता दें कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के तहत 1947 से पहले बने धार्मिक स्थलों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन इनका प्राचीन स्वरूप तय करने पर एक्ट के तहत कोई पाबंदी नहीं है।
