July 8, 2026

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‘ईसाई धर्म अपनाने वाला अनुसूचित जाति का नहीं…एससी/एसटी एक्ट का लाभ नहीं ले सकता’, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले हिंदू को अनुसूचित जाति का नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाले हिंदू को एससी/एसटी एक्ट का लाभ भी नहीं मिल सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के मुताबिक सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों के लिए ही अनुसूचित जाति समुदायों का दर्जा है। इनके अलावा कोई दूसरा धर्म (ईसाई या इस्लाम) अपनाता है तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है। इस मामले में चिंतादा नाम के व्यक्ति की ओर से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीके. मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इसके साथ ही आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कोई भी व्यक्ति जिसने ईसाई धर्म अपना लिया है और सक्रिय तौर पर उसका पालन करता है, वो अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं रह सकता। कोर्ट ने सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद कहा था कि अपील करने वाला एक दशक तक ईसाई धर्म को मानता रहा और पादरी के तौर पर रविवार को प्रार्थनाएं भी कराता रहा। चिंतादा ने एक व्यक्ति पर जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाते हुए एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस अहम फैसले के बाद धर्मांतरण करने वाले अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के लिए एससी/एसटी एक्ट का लाभ उठाने का रास्ता बंद हो गया है। कानून के तहत अगर कोई अनुसूचित जाति या जनजाति का व्यक्ति धर्मांतरण करता है, तो उसे संविधान के प्रावधानों के तहत आरक्षण का लाभ भी नहीं मिलता। इस तरह सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत दूरगामी असर करने वाला है। अब अनुसूचित जाति के ईसाई या इस्लाम में धर्मांतरण कर लेने वाले व्यक्ति के लिए किसी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत केस करना संभव नहीं रहेगा। बता दें कि पहले से ही एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों पर सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी, लेकिन कानून का संशोधन कर सरकार ने फिर तत्काल गिरफ्तारी को बहाल किया था।

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