किराएदार हैं तो इस खबर को ध्यान से पढ़ लीजिए, केरल हाईकोर्ट ने सुनाया है अहम फैसला
कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने किराएदारों के पक्ष में अहम फैसला देते हुए एक मकान मालिक को 15000 रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया है। केरल हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मकान का मालिक किराएदार की सहमति के बिना या जबरन उसके वैध कब्जे वाले परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। अगर मकान मालिक वैध किराएदार वाली संपत्ति में प्रवेश करता है, तो उसे आपराधिक अतिक्रमण का दोषी माना जाएगा। केरल हाईकोर्ट ने कहा कि किराया नियंत्रण कानून (रेंट कंट्रोल एक्ट) के तहत भी मकान मालिक को कानूनी प्रक्रिया का रास्ता ही लेना होगा।
ये मामला साल 2009 का है। किराएदार ने आरोप लगाया कि वो तथा पत्नी बाहर थे। उस वक्त मकान मालिक आया और उसने ताला तोड़कर घर में रखा सारा सामान बाहर फेंक दिया। किराएदार ने आरोप लगाया कि इससे उसे 10 हजार रुपए की क्षति हुई। आस-पास के लोगों ने गवाही में कहा कि उन्होंने मकान मालिक को प्रवेश करते और किराएदार का सामान बाहर फेंकते देखा था। इस पर ट्रायल कोर्ट ने मकान मालिक को 1 साल की सजा सुनाई थी। जिसे बाद में 3 महीने कर दिया था। मकान मालिक ने इसके बाद केरल हाईकोर्ट का रुख किया।
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अगर मकान मालिक किराए वाले घर का ताला तोड़ता और जबरन सामान हटाता है, तो वो आईपीसी की धारा 427 और 454 के तहत अपराध है। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक को साबित करना होगा कि उसे जगह की वास्तविक जरूरत है। सिर्फ किराएदार को निकालने के लिए घर खाली नहीं करा सकते। केरल हाईकोर्ट के मुताबिक जब तक किराया दिया जा रहा या रेंट एग्रीमेंट वैध है, किराएदार का ही संपत्ति पर कानूनी कब्जा माना जाएगा। अगर किराएदार की पत्नी उस जगह रह रही है, तो इसे किराएदार के ही कब्जे में माना जाएगा। भले ही मूल किराएदार उस जगह न रहता हो। केरल हाईकोर्ट ने हालांकि, मकान मालिक की सजा को कोर्ट का कामकाज खत्म होने तक की सजा सुनाई। साथ ही 15000 रुपए हर्जाना न देने पर सजा को 1 महीने करने का आदेश दिया।
