पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले 45 लाख वोटरों का मामला निपटाया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए एसआईआर की प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब 60 लाख से ज्यादा लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले वोटरों का मामला न्यायिक अधिकारी देख रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक न्यायिक अधिकारियों ने अब तक पश्चिम बंगाल के इन लॉजिकल ड्रिस्क्रिपेंसी वाले 45 लाख वोटरों का मामला निपटाया है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि न्यायिक अधिकारियों की ओर से निपटाए गए मामलों में 40 से 45 फीसदी वोटरों के नाम कट गए हैं। अब और 15 लाख 6 हजार 675 वोटरों के मामले बचे हैं।
ऐसे में माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर और उसके बाद करीब 80 लाख वोटरों के नाम कट सकते हैं। फिलहाल, ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जहां माता-पिता का नाम वोटर लिस्ट में है, लेकिन बेटे, बेटी या बहू के नाम काट दिए गए हैं। जबकि, कोलकाता का ऐसा मामला भी है, जहां एक ही पते पर 100 से ज्यादा खास समुदाय के वोटर मिले हैं। पश्चिम बंगाल में जिनके नाम न्यायिक अधिकारी काट रहे हैं, उनको अब ट्रिब्यूनल में अपील करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 19 न्यायिक ट्रिब्यूनल बनाए हैं। ट्रिब्यूनल की जिम्मेदारी कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जजों को दी गई है। इन ट्रिब्यूनल में डीईओ और एईआरओ के जरिए ऑफलाइन या ECINET एप के जरिए ऑनलाइन अपील दाखिल किए जा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है। राज्य में पिछले 15 साल से सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर उसके वोटरों के नाम काट रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि उसे देखना है भारतीय नागरिक ही वोट डाल सकें। जबकि, बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी सरकार के दौरान बड़ी तादाद में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर बनाया गया। जिनके नाम एसआईआर में कट रहे हैं। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर सियासत बहुत गर्माई हुई है। सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले को देख रहा है।
