पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों ने काटे लाखों वोटर के नाम, जानिए ट्रिब्यूनल से हरी झंडी मिलने पर क्या ये दे सकेंगे वोट?
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में लॉजिकल ड्रिस्क्रिपेंसी वाले 60 लाख वोटरों में से 59 लाख से ज्यादा के मामले न्यायिक अधिकारियों ने निपटा दिए हैं। बताया जा रहा है कि न्यायिक अधिकारियों ने 27 लाख वोटरों के नाम काटे हैं। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव की वोटिंग है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि न्यायिक अधिकारियों ने जिन वोटरों के नाम काटे, वे ट्रिब्यूनल से राहत मिलने पर मतदान कर सकेंगे?
इस सवाल का जवाब फिलहाल न दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल एसआईआर पर सुनवाई के दौरान ये मसला उठा था। ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल सरकार के वकीलों ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच से गुजारिश की थी कि 15 अप्रैल तक जिन वोटरों को ट्रिब्यूनल से हरी झंडी मिल जाए, उनको वोट डालने दिया जाए। ये गुजारिश भी की गई कि ट्रिब्यूनलों को अपील करने वाले वोटरों के मामले में जल्दी फैसला करने के लिए कहा जाए। दोनों ही गुजारिशों को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना है। बेंच के सदस्य जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा कि ऐसा करने से अव्यवस्था मच जाएगी।
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद मृत, दोहरे और दूसरी जगह चले जाने वाले 60 लाख वोटरों के नाम हटा दिए थे। इनके अलावा लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले 60 लाख 6 हजार वोटरों को नोटिस भेजा गया था। विवाद होने के बाद इन्हीं 60 लाख 6 हजार वोटरों पर फैसला करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद ट्रिब्यूनल भी गठित करने का आदेश दिया था। ताकि न्यायिक अधिकारियों ने जिन वोटरों के नाम काटे, वे ट्रिब्यूनल में अपील कर सकें। इन 19 ट्रिब्यूनलों के आज या कल से काम शुरू करने की उम्मीद है। न्यायिक अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल के जिन वोटरों के नाम काटे हैं, उनमें से करीब 7 लाख अब तक ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल कर चुके हैं। इन वोटरों को अपने पक्ष में पुराने के साथ ही नए दस्तावेज दाखिल करने का भी अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने दिया है।
