बंगाल में SIR के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR के काम में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को बुधवार को बंधक बनाए जाने की घटना का सुप्रीम कोर्ट ने आज संज्ञान लेते हुए इस पर सख्त नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली बंगाल सरकार को जमकर फटकारा भी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं उनको घंटों तक बिना सुरक्षा, भोजन और पानी के रखा गया, जो बेहद चिंताजनक है। न्यायालय ने बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
शीर्ष कोर्ट की बेंच ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वो न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और एसआईआर सुनवाई प्रक्रिया के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती करे। कोर्ट ने चुनाव आयोग को उपरोक्त घटना की जांच CBI या NIA से कराने का निर्देश दिया है और जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जमा करने को बोला है। बेंच ने इस घटना को दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास बताते हुए कहा है कि यह बंगाल सरकार की नाकामी है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि जहां भी SIR के काम में लगे अधिकारी रुकें, वहां उनको सुरक्षा दी जाए और जरूरत पड़ने पर उनके परिवार के सदस्यों को भी सुरक्षा दी जाए। SIR से जुड़े दावे और आपत्तियों का जहां निपटारा हो रहा है, वहां पर एक समय में 5 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा नहीं हों। चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाते हुए कहा कि दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है। आपको क्या लगता है कि हम नहीं जानते कि उपद्रवी कौन थे? रात 2 बजे तक मैं स्थिति की जानकारी ले रहा था।
