दूसरों की लकीर छोटी करने के बजाय अपनी लकीर बड़ी करो, पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया सफलता का सिद्धांत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवकों की क्षमता विकास के लिए आज कर्मयोगी साधना सप्ताह का शुभारंभ किया। इस दौरान अपने संबोधन मोदी ने कहा कि सफलता का एक बड़ा सिद्धांत यह भी है कि दूसरों की लकीर को छोटा करने के बजाय अपनी लकीर को बड़ा करो। हमारे देश में आजादी के बाद से कई तरह की संस्थाएं अलग-अलग फोकस के साथ काम कर रही थीं लेकिन एक ऐसी संस्था की आवश्यकता थी जिसका फोकस क्षमता निर्माण हो, जो सरकार में काम करने वाले हर कर्मचारी, हर कर्मयोगी का सामर्थ्य बढ़ाए। हमें हमारे वर्तमान प्रयासों को भविष्य के एक बड़े कैनवास पर देखना चाहिए। 2047 में विकसित भारत, यही हमारा कैनवास है, यही हमारा लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें तीव्र आर्थिक विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है। हमें देश में एक विशाल कुशल कार्यबल विकसित करना होगा। इन उद्देश्यों की सफलता में सार्वजनिक संस्थानों और लोक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। 21वीं सदी के इस कालखंड में तेजी से बदलती व्यवस्थाएं, तेजी से बदलती दुनिया और उनके बीच उसी रफ्तार से आगे बढ़ता हमारा भारत। इसके लिए पब्लिक सेवा को समय के अनुरूप निरंतर अपडेट करना जरूरी है। कर्मयोगी साधना सप्ताह उसी प्रयास की एक अहम कड़ी है। आज गवर्नेंस के जिस सिद्धांत को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसका मूलमंत्र है ‘नागरिक देवो भवः’। इस मंत्र में समाहित भावना के साथ आज पब्लिक सर्विस को ज्यादा काबिल और नागरिकों के लिए ज्यादा संवेदनशील बनाने पर फोकस किया जा रहा है।
मोदी बोले, जब हम लर्निंग की बात करते हैं, तो आज के परिपेक्ष्य में तकनीकी का महत्व बहुत बढ़ जाता है। आप सब देख रहे हैं कि बीते 11 वर्षों में शासकीय और प्रशासकीय कामों में किस तरह तकनीकी का एकीकरण हुआ है। हमने शासन और वितरण से लेकर अर्थव्यवस्था तक तकनीकी क्रांति की ताकत देखी है। अब AI की दस्तक के बाद ये बदलाव और तेज होने वाला है इसलिए तकनीकी को समझना और उसका उपयोग करना अब पब्लिक सर्विस का जरूरी हिस्सा बन चुका है।
