अदालती फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, हाईकोर्ट के लिए तय कर दी टाइमलाइन
नई दिल्ली। अदालतों में लंबित मामलों और फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। इसी के साथ शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के लिए फैसले सुनाने की टाइमलाइन जारी कर दी है। शीर्ष अदालत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने उच्च न्यायालयों को यह निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद उसे तीन महीने के भीतर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं जमानत के मामलों में फैसला अगले दिन तक सुना दिया जाना चाहिए और फैसले की जानकारी आदर्श रूप से उसी दिन जेल अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि अंडरट्रायल कैदियों जिनको जमानत मिल चुकी है, उनकी रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अदालत अपने आदेश के प्रभावी हिस्से को कोर्ट में सुनाएगी। उसके बाद 7 दिनों के भीतर वेबसाइट पर पूरा विस्तृत आदेश अपलोड करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर फैसले को सुरक्षित रखने की तारीख भी अनिवार्य रूप से मेंशन होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा कि अगर दिशा निर्देशों का ठीक प्रकार से पालन नहीं किया जाता है तो मामले को किसी दूसरी बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए भेजा जा सकता है। वहीं अगर 30 दिनों में कारण अपलोड नहीं किए जाने पर मामला नई बेंच को ट्रांसफर किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि अंडरट्रायल कैदियों जिनको जमानत मिल चुकी है, उनकी रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अदालत अपने आदेश के प्रभावी हिस्से को कोर्ट में सुनाएगी। उसके बाद 7 दिनों के भीतर वेबसाइट पर पूरा विस्तृत आदेश अपलोड करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर फैसले को सुरक्षित रखने की तारीख भी अनिवार्य रूप से मेंशन होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा कि अगर दिशा निर्देशों का ठीक प्रकार से पालन नहीं किया जाता है तो मामले को किसी दूसरी बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए भेजा जा सकता है। वहीं अगर 30 दिनों में कारण अपलोड नहीं किए जाने पर मामला नई बेंच को ट्रांसफर किया जा सकता है।
