June 18, 2026

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होर्मुज पर 60 दिन बाद टोल वसूल सकेगा ईरान, अमेरिका से शांति समझौते के तहत मिला अधिकार

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म कर शांति स्थापित करने के लिए समझौते पर दस्तखत हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने-अपने देश की तरफ से इस समझौते पर दस्तखत किए। दोनों के बीच ये अंतरिम समझौता है। अब अमेरिका और ईरान 60 दिन तक बातचीत कर फाइनल शांति समझौता तय करेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं पर समझौता हुआ है।

अमेरिका से शांति समझौते के तहत होर्मुज से 60 दिन तक जहाजों को बिना किसी फीस के गुजरने दिया जाएगा। इसके बाद टोल वसूलने का विकल्प रखा गया है। अमेरिका से हुए समझौते में लिखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और होर्मुज से लगे संप्रभु अधिकारों के मुताबिक ईरान फारस की खाड़ी के दूसरे तटीय देशों से चर्चा कर होर्मुज में भविष्य के प्रबंधन और समुद्री सेवाओं को तय करने के लिए ओमान से बात करेगा। शांति समझौते के लिए ईरान के मुख्य वार्ताकार और वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने ईरान के सरकारी टीवी से कहा कि होर्मुज अब युद्ध से पहले जैसी हालत में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि होर्मुज पर ईरान का संप्रभु हक है। इसलिए वहां सेवा देने के बदले फीस लेंगे। माना जा रहा है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरान 1 डॉलर प्रति बैरल फीस लेगा।

उधर, अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक समझौते में कहा गया है कि ईरान को पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 मिलियन डॉलर मिलेंगे। ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और उसके संवर्धित यूरेनियम की क्षमता को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए कम करेगा। परमाणु संबंधी समझौते के बाद ईरान पर लगे प्रतिबंध खत्म कराने के लिए अमेरिका कदम उठाएगा। समझौते के मुताबिक अमेरिका, ईरान और दोनों के सहयोगी सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान बंद करेंगे। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के साथ आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते की शर्त के तहत अमेरिका और ईरान 60 दिन तक बातचीत करेंगे। ताकि अंतिम शांति समझौता किया जा सके। ये समयसीमा बढ़ाई भी जा सकती है।

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