नौवीं कक्षा के छात्र अब इंदिरा गांधी की लगाई इमरजेंसी के बारे में पढ़ेंगे, एनसीईआरटी ने नई किताब में रखा पाठ
नई दिल्ली। आज आपातकाल यानी इमरजेंसी की बरसी है। पीएम रहते इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात देश में आपातकाल लगाया था। आपातकाल लगाने को बीजेपी संविधान की हत्या का दिन करार देती है और इस मसले पर कांग्रेस से उसके नेताओं की जुबानी जंग होती रहती है। इमरजेंसी क्यों लगाई गई, कितने वक्त इमरजेंसी थी, किन नेताओं को इमरजेंसी में जेल जाना पड़ा और इमरजेंसी के वक्त किस-किस तरह के अत्याचार हुए? इन सभी मसलों पर बीजेपी कांग्रेस को घेरती रही है। हालांकि, नई पीढ़ी को इमरजेंसी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। अब बच्चों को स्कूल की पढ़ाई के दौरान इमरजेंसी के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के लिए सामाजिक विज्ञान की नई किताब में आपातकाल पर चैप्टर रखा है। इमरजेंसी के बारे में अब तक 11वीं और 12वीं क्लास में पढ़ाया जाता रहा है। एनसीईआटी की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियांड’ में लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां पाठ में इमरजेंसी के बारे में बताया गया है। किताब में इमरजेंसी के बारे में पेज नंबर 155 में बताया गया है। इस पाठ में बताया गया है कि इमरजेंसी कब लगाई गई और कब तक लागू थी। एनसीईआरटी ने पाठ में ये जानकारी भी दी है कि किस तरह इमरजेंसी के दौरान आम लोगों के मौलिक अधिकार खत्म किए गए। इसमें जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के बारे में भी बताया गया है।
इंदिरा गांधी ने 21 महीने तक इमरजेंसी लगाए रखी थी। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी के संसदीय चुनाव को रद्द कर वहां से समाजवादी नेता राजनारायण को विजेता घोषित किया था। इसके बाद इंदिरा गांधी को सत्ता से हटाने के लिए आंदोलन छिड़ गया। गुजरात में छात्रों ने भी आंदोलन शुरू किया। वहीं, जयप्रकाश नारायण देशभर में जहां भी जाते, वहां भारी भीड़ उनका साथ देते हुए ‘इंदिरा हटाओ’ के नारे लगाती। ऐसे में इंदिरा गांधी ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम और वकील सिद्धार्थ शंकर राय की सलाह पर 25 जून 1975 की आधी रात से इमरजेंसी लगवा दी। कहा जाता है कि तब राष्ट्रपति रहे फखरुद्दीन अली अहमद बाथटब में नहा रहे थे, जब उनसे इमरजेंसी की अधिसूचना पर दस्तखत कराए गए। ये आरोप भी है कि इंदिरा ने बिना मंत्रीमंडल से पूछे इमरजेंसी लगा दी। इमरजेंसी के दौरान सभी बड़े नेता जेल में रहे। साथ ही जबरन नसबंदी के कारण जनता में भी नाराजगी पनपी।
