सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के बयान के बाद संभल में माहौल बिगड़ा और हिंसा हुई!’, न्यायिक आयोग ने योगी सरकार को सौंपी जांच रिपोर्ट में किया दावा
लखनऊ। यूपी के संभल में 24 नवंबर 2024 को जमकर हिंसा हुई थी। इस हिंसा की जांच के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाया था। संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट योगी सरकार को सौंप दी थी। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट यूपी विधानमंडल के 3 अगस्त से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र में रखी जाएगी। न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि न्यायिक आयोग ने संभल में हिंसा भड़कने में सपा के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के बयान को सबसे बड़ी वजह माना है। आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि सपा सांसद के बयान के बाद ही माहौल तेजी से बिगड़ा।
न्यूज चैनल की खबर के मुताबिक संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग ने जो रिपोर्ट दी, उसमें 22 नवंबर 2024 को जियाउर्रहमान बर्क के बयान पर अंगुली उठाई है। आयोग ने रिपोर्ट में लिखा है कि बर्क ने कहा- हम इस देश के मालिक हैं, नौकर और गुलाम नहीं। इस बयान के बाद ही संभल का माहौल बिगड़ा और वहां 24 नवंबर की सुबह उस वक्त हिंसा भड़की, जब विवादित शाही जामा मस्जिद का कोर्ट कमिश्नर सर्वे चल रहा था। चैनल ने खबर में ये भी बताया है कि न्यायिक आयोग ने संभल में डेमोग्राफिक बदलाव के बारे में भी कहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1947 में संभल नगर पालिका इलाके में 45 फीसदी हिंदू थे, लेकिन अब हिंदुओं की आबादी 15 फीसदी रह गई है। दंगे, हिंसा, धर्मांतरण और अन्य घटनाओं की डेमोग्राफिक बदलाव की वजह बताया गया है।
न्यायिक आयोग ने संभल में 1936 से 2019 तक 15 बड़े दंगे होने की बात कही है। इन दंगों में 213 लोग मारे गए। रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों में 209 हिंदू थे। जबकि, 29 मार्च 1978 को होली के बाद संभल में हुए दंगों में 184 हिंदुओं की जान गई। जबकि, 1992 में 2 और 2019 में 2 मुस्लिमों ने भी जान गंवाई। चैनल की खबर के मुताबिक आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि संभल के कई धार्मिक स्थलों पर भी कब्जा किया गया। संभल में 68 तीर्थ और 19 पवित्र कुएं थे। जिन पर लोग काबिज हो गए। इस रिपोर्ट में गैंगस्टर शारिक साठा का भी नाम लिया गया है। आयोग का दावा है कि उसका कनेक्शन पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े जाली नोट बनाने वाले गैंग से रहा।
