महाकुंभ में स्नान पर विवादास्पद बयान देकर फंसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे!, बिहार के कोर्ट में परिवाद दाखिल
मुजफ्फरपुर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के महाकुंभ में स्नान संबंधी विवादास्पद बयान देने का मामला बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित कोर्ट पहुंच गया है। वकील सुधीर ओझा ने इस बयान को हिंदू धर्म मानने वालों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए कोर्ट में मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ परिवाद दाखिल किया है। कोर्ट ने इस मामले में 3 फरवरी को सुनवाई की तारीख तय की है। कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दाखिल परिवाद में कहा गया है कि मल्लिकार्जुन खरगे ने सिर्फ धार्मिक भावनाएं ही आहत नहीं की, समाज में धार्मिक असंतुलन पैदा करने की भी कोशिश की। परिवाद में तमाम धाराओं के तहत खरगे पर केस चलाने की अपील की गई है। इनमें शांति भंग की कोशिश का भी मामला बनने की बात कही गई है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को मध्य प्रदेश के महू में कांग्रेस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि क्या गंगा में स्नान करने से गरीबी खत्म होगी। क्या भूखे पेट भरेंगे। क्या बेरोजगारी दूर होगी। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के स्नान पर सवाल उठाया था और ये भी कहा था कि बीजेपी के नेताओं के बीच कैमरों के सामने डुबकी लगाने की होड़ मची है। अपने बयान के बीच खरगे ने हालांकि ये भी कहा था कि अगर किसी को उनकी बात से ठेस पहुंची, तो माफी मांग रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा था कि किसी की आस्था पर सवाल नहीं खड़े कर रहे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ये भी कहा था कि जब बच्चे भूख से मर रहे हैं, स्कूल नहीं जा रहे, मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही, तब ये लोग हजारों रुपए खर्च कर गंगा में डुबकी लगाने की प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान पर बीजेपी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। बीजेपी के नेताओं ने खरगे के बयान को हिंदू और सनातन विरोधी बताया था। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के इस बयान को गलत बताया था। तमाम यूजर्स ने ये भी कहा था कि प्रयागराज महाकुंभ में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि कोर्ट में जो परिवाद दाखिल हुआ है, उससे बचने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे के वकील क्या दलील देते हैं।
