चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाना शुरू किया विशाल बांध, जानिए भारत के लिए ये कितनी चिंता का विषय?
बीजिंग। चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर विशाल बांध बनाना शुरू कर दिया है। भारत से लगी एलएसी के पास दक्षिण-पूर्वी तिब्बत के निंगची में ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग सांगबो) पर चीन ये बांध बना रहा है। चीन के पीएम ली कियांग ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे बांध का शिलान्यास किया है। चीन की सरकार ने साल 2024 में ब्रह्मपुत्र नदी पर विशाल बांध बनाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे बड़ा बांध बनाने के लिए चीन 167 अरब डॉलर खर्च करने जा रहा है। इस बांध को चीन ने कार्बन न्यूट्रल बनने के लक्ष्य के तहत बनाने का एलान किया है।
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन जिस बांध को बना रहा है, उसमें पांच पनबिजली घर होंगे। चीन के यांगत्से नदी पर बने थ्री गॉर्जेस बांध से ज्यादा बिजली ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे बांध से तैयार होगी। चीन की सरकार का कहना है कि तिब्बत के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में इस बांध से काफी बिजली दी जा सकेगी। ब्रह्मपुत्र नदी पर जो बांध चीन बना रहा है, वो भारत के अरुणाचल प्रदेश के काफी पास है। भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाए जाने की योजना पर इस साल की शुरुआत में चिंता जताई थी। भारत ने चीन से कहा था कि वो ये सुनिश्चित करे कि बांध बनने के बाद ब्रह्मपुत्र के निचले इलाकों यानी अरुणाचल प्रदेश और असम पर कोई असर न पड़े। इस पर चीन का जवाब आया था कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध से किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
भारत के अलावा बांग्लादेश ने भी ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनने से होने वाले नुकसान की आशंका जताई थी। इसकी वजह ये है कि तिब्बत से भारत में प्रवेश करने वाली ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल और असम में बहने के बाद बांग्लादेश में प्रवेश करती है। जहां ये गंगा से मिल जाती है। बांग्लादेश में इस नदी का नाम पद्मा है। पद्मा बांग्लादेश की मुख्य नदी है और इससे वहां सिंचाई के लिए काफी पानी मिलता है। चीन के इस बांध को अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू ने बीते दिनों भारत की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया था। वहीं, असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि ब्रह्मपुत्र नदी में ज्यादातर पानी भारत के इलाके में बारिश से आता है। इस वजह से भारत के लिए चिंता की बात नहीं है। कुल मिलाकर ये चिंता जताई जा रही है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध को चीन हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है।
