चंदा कोचर ने 64 करोड़ की रिश्वत लेकर वीडियोकॉन ग्रुप को 300 करोड़ रुपए लोन दिया : ट्रिब्यूनल ने आदेश में कहा
नई दिल्ली। आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी कुछ लेना और कुछ देना से संबंधित मामले में दोषी पाया है। अखबार नवभारत टाइम्स के मुताबिक ट्रिब्यूनल ने 3 जुलाई को आदेश जारी किया है। चंदा कोचर मामले में ट्रिब्यूनल ने कहा है कि चंदा कोचर ने वीडियोकॉन ग्रुप को 300 करोड़ का लोन देने के बदले पति के जरिए रिश्वत ली। चंदा कोचर पर आरोप लगा था कि उन्होंने वीडियोकॉन ग्रुप से 64 करोड़ की रिश्वत ली।
अखबार ने बताया है कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ने मामले की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों को सही माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि चंदा कोचर के रिश्वत लेने के मामले में ईडी ने सबूतों से साबित किया कि पूरे मामले का इतिहास सही है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 50 के तहत बयान भी कानूनी तौर पर मान्य हैं। इन बयानों पर भरोसा किया जा सकता है। इससे साफ है कि चंदा कोचर पर ईडी ने जो आरोप लगाए, वे सही हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि वीडियोकॉन ग्रुप के मुख्य प्रबंध निदेशक और एनआरपीएल के मालिक वीएन धूत हैं, लेकिन धूत का कहना है कि कंपनी पर चंदा कोचर के पति दीपक कोचर का नियंत्रण था।
अपीलीय ट्रिब्यूनल ने इस मामले में एडजुकेंटिंग अथॉरिटी यानी निर्णायक प्राधिकरण की ओर से नवंबर 2022 में आरोपियों को राहत देने की आलोचना भी की है। प्राधिकरण ने इस मामले में जब्त 78 करोड़ की संपत्ति को वापस देने के लिए कहा था। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्राधिकरण ने तथ्यों की अनदेखी कर ये आदेश दिया था।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि वीडियोकॉन ग्रुप को 300 करोड़ का लोन देने से मिले 64 करोड़ रुपए एनआरपीएल को ट्रांसफर हुए। जिसे चंदा कोचर के पति दीपक कोचर मैनेजिंग डायरेक्टर के लिहाज से देखते थे। चंदा कोचर इस मामले को अब ऊपरी अदालतों में चुनौती दे सकती हैं। साल 2018 में चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ और एमडी पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद बैंक ने उनको नौकरी से बर्खास्त किया था। चंदा कोचर ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों के आलोक में बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया था।
