भारत पर टैरिफ लगाने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का अमेरिका में ही विरोध, निक्की हेली और अमेरिका के पूर्व राजनयिक जेफ्री पायट ने दी ये नसीहत
वॉशिंगटन। भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर अमेरिका में ही सवाल उठ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली और अमेरिका के पूर्व राजनयिक जेफ्री पायट ने चीन का नाम लेते हुए भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले को सवालों में घेरा है। भारतवंशी निक्की हेली ने न्यूजवीक पत्रिका में लेख लिखकर ट्रंप प्रशासन को नसीहत दी है। निक्की हेली ने लिखा है कि अमेरिका को अपनी सबसे खास बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे दोस्त की जरूरत है।
निक्की हेली ने लिखा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते नाजुक मोड़ पर हैं। अगर चीन की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को अमेरिका नियंत्रित करना चाहते है, तो भारत से रिश्तों को जल्द सुधारना होगा। उन्होंने लिखा है कि रूस के कच्चे तेल टैरिफ के मसलों पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों के बीच दरार पैदा करने की मंजूरी नहीं देनी चाहिए। वहीं, अमेरिका के पूर्व राजनयिक जेफ्री पायट ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि टैरिफ लगाने के कारण भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय भरोसे पर गहरा असर पड़ा है। जेफ्री पायट ने कहा कि भारत से मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी के बगैर चीन पर ट्रंप प्रशासन निर्भरता कम नहीं कर पाएगा।
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले लगातार ये कहा कि भारत से व्यापार समझौता बस होने ही वाला है। इसके बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष हुआ, तो ट्रंप के सुर अचानक बदलने लगे। पहले ट्रंप ने गलत दावा किया कि भारत और पाकिस्तान को कारोबार न करने की धमकी देकर उन्होंने सैन्य संघर्ष रुकवाया। इसके बाद ट्रंप ने भारत पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया। उसके बाद रूस से कच्चा तेल और हथियार खरीदने का आरोप लगाते हुए और 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया। इस तरह भारत पर 50 फीसदी टैरिफ हो चुका है। वहीं, भारत ने साफ कहा है कि अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम और अन्य सामान खरीद रहा है। यहां तक कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन तो अलास्का में ट्रंप के सामने ही कह चुके हैं कि उनके देश और अमेरिका के बीच कारोबार 20 फीसदी बढ़ा है।
