‘फायदा मिलने तक रूस से कच्चे तेल की हर बूंद खरीदेंगे’, ओएनजीसी चेयरमैन का बड़ा बयान
नई दिल्ली। सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह ने साफ कहा है कि जब तक आर्थिक और कारोबारी लिहाज से फायदेमंद होगा, उनकी कंपनियां रूस से कच्चा तेल खरीदती रहेंगी। ओएनजीसी चेयरमैन ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि मोदी सरकार ने रूस से कच्चा तेल आयात कम करने या उसे रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया है। अरुण कुमार सिंह ने बताया कि रूस के कच्चे तेल पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बस अमेरिका और यूरोप के देशों ने रूस के कच्चे तेल पर प्राइस कैप लगा रखा है।
ओएनजीसी की दो तेल कंपनियां हैं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल)। ओएनजीसी चेयरमैन अरुण कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब तक आर्थिक तौर पर फायदेमंद है, हम बाजार से रूस के कच्चे तेल की हर बूंद खरीदते रहेंगे। यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपनी जरूरत के कच्चे तेल का सिर्फ 2 फीसदी रूस से खरीदता था। रूस के कच्चे तेल पर जब अमेरिका और यूरोप के देशों ने प्राइस कैप लगाया, तो उसने भारत को सस्ते में कच्चा तेल बेचने का ऑफर दिया। जिसके बाद भारत ने बड़ी तादाद में रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। फिलहाल रूस से भारत 35 से 40 फीसदी कच्चा तेल खरीदता है। जिसमें से बहुत सारा रिफाइन कर यूरोपीय देशों और अमेरिका को भी भारत बेचता है।
रूस से कच्चा तेल लेने के कारण भारत पर अमेरिका ने पेनाल्टी के तहत और 25 फीसदी टैरिफ लगाया हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति और उनके सलाहकार आरोप लगा रहे हैं कि रूस से कच्चा तेल खरीदकर भारत यूक्रेन के खिलाफ अपने पुराने सहयोगी देश की मदद कर रहा है। ट्रंप के एक सलाहकार पीटर नवारो ने तो एक हाथ आगे बढ़कर यूक्रेन मसले को मोदी का युद्ध तक कह दिया, लेकिन भारत ने साफ कहा है कि वो किसी दबाव में नहीं आएगा। मोदी सरकार में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बीते दिनों रूस में ही ये कहा था कि भारत सरकार देश के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए फैसला लेगी। भारत ने रूस की मदद करने के अमेरिका के आरोप पर पलटवार भी किया है। भारत ने आंकड़े जारी कर बताया है कि खुद अमेरिका और यूरोपीय देश किस तरह रूस से गैस और यूरेनियम समेत तमाम सामान खरीद रहे हैं।
