अमेरिका में पुलिस ने भारतीय इंजीनियर को मारी गोली, परिवार को दो हफ्ते बाद मिली मौत की खबर, मृतक के पिता ने विदेश मंत्रालय से लगाई गुहार
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के तेलंगाना के महबूबनगर जिले के रहने वाले मोहम्मद निजामुद्दीन नाम के एक युवा इंजीनियर को अमेरिका में पुलिस ने गोली मार दी, इसमें उसकी मौत हो गई। निजामुद्दीन पर कथित तौर पर उसके रूम मेट पर चाकू से हमला करने का आरोप था। कैलिफोर्निया के सांता कलारा में 3 सितंबर को यह घटना हुई थी। मृतक के पिता मोहम्मद हसनुद्दीन ने बताया कि उन्हें गुरुवार 18 सितंबर को घटना की जानकारी हुई। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाते हुए मामले में हस्तक्षेप करने और शव को भारत लाए जाने की मांग की है।
हसनुद्दीन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे पत्र में कहा, मेरे बेटे को सांता क्लारा पुलिस ने गोली मार दी और उसका पार्थिव शरीर कैलिफोर्निया के सांता क्लारा के किसी अस्पताल में है। मुझे नहीं पता कि पुलिस ने ऐसा क्यों किया। मेरा अनुरोध है कि बेटे के पार्थिव शरीर को महबूबनगर लाने में मदद की जाए। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा किसी पर हमला नहीं कर सकता। उन्होंने घटना की वास्तविक परिस्थिति का पता लगाने के लिए विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे के साथ नस्लीय भेदभाव किया जा रहा था। इसी वजह से उसके रूममेट के साथ इस महीने की शुरुआत में उसका झगड़ा भी हुआ था। इसकी जानकारी जब उसने हमें दी थी तो हमने उसे कमरा बदलने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी थी।
उधर, सांता क्लारा के पुलिस प्रमुख कोरी मॉर्गन का कहना है कि 3 सितंबर के दिन पुलिस को सुबह लगभग 6 बजे एक इमरजेंसी कॉल आई। जब पुलिस उस जगह पर पहुंची तो स्थिति हिंसा में बदल चुकी थी। निजामुद्दीन के हाथ में एक चाकू था और वह रूममेट पर फिर से हमला करने के लिए तैयार दिख रहा था। पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया मगर वो नहीं माना इस वजह से पुलिस के पास गोली चलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
