एसआईआर से पश्चिम बंगाल में कट जाएंगे इतने लाख वोटर के नाम!, फिर क्या करेंगी ममता बनर्जी?
कोलकाता। वोटरों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर शुरू होने के बाद एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल से बांग्लादेशियों का पलायन हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में 10 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट सकते हैं! चैनल न्यूज18 ने चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। खबर के मुताबिक एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग को बीएलओ से मिली रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में 6 से 6.5 लाख नाम मृतकों के हैं। अन्य 3.5 लाख नाम दोहरी जगह, दूसरी जगह शिफ्ट हुए या पता न चलने वाले वोटरों के हैं।
पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक अभी ये पक्का नहीं है कि 10 लाख नाम कटेंगे ही। अगर कोई परिवार दावा करता है कि वोटर जीवित है या मौजूद है, तो उसका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता तभी 10 लाख वोटरों के नाम कटेंगे। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान 7.64 करोड़ वोटरों में से 7.66 करोड़ वोटरों को एसआईआर फॉर्म दिए जा चुके हैं। यानी 99.75 फीसदी वोटरों को एसआईआर फॉर्म बांटा जा चुका है। इसके अलावा 3.77 करोड़ वोटरों के फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। इससे पहले बिहार में एसआईआर के दौरान 48 लाख वोटरों के नाम कट गए थे। जिसे लेकर काफी हंगामा भी मचा था। पश्चिम बंगाल में 10 लाख वोटरों के नाम कटने पर भी हंगामा मचना तय है।
पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी साफ कह चुकी हैं कि अगर एक भी वोटर का नाम कटा, तो वो बड़ा आंदोलन करेंगी। एसआईआर के खिलाफ ममता बनर्जी उत्तर 24 परगना के बनगांव में जनसभा भी कर चुकी हैं। चुनाव आयोग देश के नागरिकों के नाम ही वोटर लिस्ट में रखने की बात कहकर एसआईआर करा रहा है। बिहार के बाद फिलहाल 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस वजह से टीएमसी और बीजेपी के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता और जोर पकड़े हुई है। एसआईआर ने इस प्रतिद्वंद्विता को और बढ़ाया है। बीजेपी आरोप लगाती है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के दम पर ममता बनर्जी चुनाव जीतती हैं। जबकि, टीएमसी और ममता बनर्जी पलटकर बीजेपी को घेरते हैं।
