लखनऊ के मशहूर इस्लामी शिक्षण संस्थान नदवा दारुल उलूम के प्रिंसिपल समेत चार पर एफआईआर, लगा ये गंभीर आरोप
लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में नदवा दारुल उलूम नाम का इस्लामी शिक्षण संस्थान है। नदवा कॉलेज के नाम से ये दुनियाभर में मशहूर है। खबर ये है कि पुलिस ने नदवा दारुल उलूम के प्रिंसिपल मौलाना अब्दुल अजीज नदवी समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में नदवा दारुल उलूम के सब रजिस्ट्रार हारुन रशीद, वॉर्डन मोहम्मद कैसर नदवी और नदवा दारुल उलूम के मेन गेट पर रहने वाले सुरक्षाकर्मी का भी नाम है। लखनऊ पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
एफआईआर में कहा गया है कि नदवा दारुल उलूम के हॉस्टल में फिलीपींस के एक नागरिक को रहने की जगह दी गई। स्थानीय पुलिस को नदवा दारुल उलूम के प्रिंसिपल, वॉर्डन समेत किसी ने ये जानकारी नहीं दी कि विदेशी नागरिक को शिक्षण संस्थान के हॉस्टल में रखा गया है। जबकि, नियमों के तहत पुलिस को जानकारी दी जानी जरूरी है। एफआईआर में लिखा गया है कि नदवा दारुल उलूम के प्रशासन को पहले ही बताया गया था कि कोई विदेशी नागरिक अगर संस्थान में आता है, तो स्थानीय थाने को उसकी जानकारी देनी होगी। इसके बावजूद नदवा दारुल उलूम ने फिलीपींस के नागरिक को अपने हॉस्टल में जगह दी और पुलिस को इत्तला नहीं की।
पुलिस अब ये छानबीन कर रही है कि नदवा दारुल उलूम में रुका फिलीपींस का नागरिक क्या करता है। मामला गंभीर होने के कारण नदवा दारुल उलूम के प्रिंसिपल समेत आरोपियों पर पुलिस सख्त कार्रवाई भी कर सकती है। नदवा दारुल उलूम भारत के पुराने इस्लामी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां आधुनिक विषयों के साथ छात्रों को इस्लाम की शिक्षा भी दी जाती है। अन्य देशों के छात्र भी बड़ी संख्या में नदवा दारुल उलूम से शिक्षा लेने के लिए आते हैं। सवाल ये है कि फिलीपींस के नागरिक को हॉस्टल में रहने की जगह देने के बारे में आखिर नदवा दारुल उलूम के प्रशासन ने पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी? जबकि, अगर होटलों और लॉज में भी अगर विदेशी नागरिक टिकते हैं, तो उनकी जानकारी भी स्थानीय पुलिस को देनी होती है।
