कार्ति चिदंबरम की मुश्किल बढ़ी, चीनी नागरिकों के वीजा घोटाला मामले में आरोप तय करने का कोर्ट ने दिया आदेश
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की मुश्किल अब बढ़ने वाली है। दरअसल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने चीनी नागरिकों के वीजा घोटाला मामले में कार्ति चिदंबरम और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप तय करने का आदेश दिया है। यह मामला साल 2011 का है। उस वक्त यूपीए सरकार में कार्ति चिदंबरम के पिता पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे। आरोप है कि एक पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे चीनी नागरिकों को वीजा दिलाने के लिए कार्ति चिदंबरम और उनके सहयोगी एस. भास्कर रमन ने बतौर रिश्वत 50 लाख रुपए लिए थे। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 16 जनवरी की तारीख दी है।
पंजाब में वेदांता समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड एक पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। यह चीनी नागरिक भी इस प्रोजेक्ट के लिए काम करने भारत आए थे। सीबीआई का आरोप है कि कार्ति चिदंबरम और भास्कर रमन ने नियमों को दरकिनार कर वीजा जारी कराया और इसके एवज में रिश्वत ली। रिश्वत की रकम को एक कंपनी में हस्तांतरित किया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज किया गया था। सीबीआई ने भास्कर पर सबूतों को नष्ट करने का आरोप भी लगाया है।
सीबीआई ने इस मामले में विकास माखरिया को इस सरकारी गवाह बनाया है। सीबीआई के मुताबिक माखरिया ने कथित तौर पर यह बात स्वीकार की है वीजा जारी करने के लिए रिश्वत दी। वहीं अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कार्ति चिदंबरम ने कहा कि जो भी कानूनी विकल्प हैं उनका इस्तेमाल किया जाएगा। उधर, कांग्रेस का आरोप है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है। कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। दूसरी तरफ सीबीआई इसे गंभीर भ्रष्टाचार का मामला बता रही है। अब अगली सुनवाई के दिन कोर्ट के द्वारा आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
