यूपी विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार बीजेपी को जीत दिलाने के लिए आरएसएस ने संभाला मोर्चा!, 15 दिन में दूसरी बार मोहन भागवत का लखनऊ दौरा
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाले हैं। यूपी में 2017 में बीजेपी की सरकार बनी थी। फिर बीजेपी ने 2022 में भी यूपी में सरकार बनाई थी। अब बीजेपी तीसरी बार यूपी की सत्ता पर काबिज होने की कोशिश में है। यूपी की सत्ता लगातार तीसरी बार हासिल करने की बीजेपी की इस कोशिश में आरएसएस के भी जुटने की पूरी उम्मीद है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत फिर लखनऊ पहुंचे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का 15 दिन में दूसरी बार लखनऊ का दौरा है। लखनऊ में बैठक के बाद मोहन भागवत दिल्ली जाएंगे। ऐसे में लग रहा है कि आरएसएस ने यूपी में बीजेपी की तीसरी बार सरकार बनाने के लिए अभी से मोर्चा संभाल लिया है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जब 18 फरवरी को लखनऊ आए थे, उस वक्त सीएम योगी आदित्यनाथ और यूपी के दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक के साथ उनकी बैठक हुई थी। इससे पहले भागवत गोरखपुर गए थे। मोहन भागवत सिर्फ लखनऊ और गोरखपुर ही नहीं गए हैं। फरवरी 2026 में मोहन भागवत मेरठ के दौरे पर भी गए थे। कुल मिलाकर मोहन भागवत बीते 21 दिन में 4 बार यूपी दौरे पर आ चुके हैं। मोहन भागवत का दौरा इस वजह से अहम है, क्योंकि यूपी में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठबंधन का राग अलापा है। पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पीडीए का नारा देकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया था।
वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ का नारा ‘बंटोगे तो कटोगे’ का है। जबकि, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत लगातार हिंदुओं की एकता और जातिभेद खत्म करने की बात करते रहे हैं। यूपी विधानसभा में 403 सीट हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 202 सीट चाहिए। यूपी में दलितों की आबादी करीब 22 फीसदी है। यूपी में दलित समुदाय के 32 लाख वोटर हैं और 150 सीट पर ये जीत और हार तय करते हैं। दलित वोटरों की ज्यादातर आबादी पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में है। वहीं, यूपी में ओबीसी वोटरों की तादाद 40 से 45 फीसदी है। इनमें से यादव समाज के ज्यादातर वोटर समाजवादी पार्टी के पाले में माने जाते हैं। ऐसे में यूपी में बीजेपी को अगर तीसरी बार सरकार बनानी है, तो उसे दलित वोटरों को अपने पाले में करना होगा। वहीं, दलितों की राजनीति करने वाली बीएसपी सुप्रीमो मायावती एक बार फिर ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वोटरों पर दांव खेलती दिख रही हैं। मायावती ने ब्राह्मणों को अपने पाले में करके 2007 में यूपी में सरकार बनाई थी।
