राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन
नरेंद्र बंसल –
मेरठ। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय “प्राचीन ज्ञान से आधुनिक नवाचार की ओर : विकसित भारत @2047 के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका” रहा। आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. निवेदिता मलिक के निर्देशन में संपन्न हुआ।
यह संगोष्ठी वनस्पति विज्ञान विभाग, आईक्यूएसी, आईकेएस, आरडीसी सेल, इनोवेशन काउन्सिल एवं प्लांट कंसर्वेशन सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। सेमिनार का प्रायोजन पुरातन छात्र संगठन, वनस्पति विज्ञान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा किया गया। इसमें देश के सात राज्यों से लगभग 200 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की संरक्षक प्रो. निवेदिता कुमारी रहीं। संयोजक एवं आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर प्रो. सोनिका चौधरी, समन्वयक प्रो. अमिता शर्मा तथा आयोजन सचिव डॉ. गरिमा मलिक ने अतिथियों का स्वागत पौध भेंट कर किया।
सेमिनार के प्रथम सत्र को प्रख्यात वनस्पतिशास्त्री प्रो. वी. पुरी तथा द्वितीय सत्र को महान वनस्पतिशास्त्री प्रो. वाई. एस. मूर्ति की स्मृति को समर्पित किया गया। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. अनुपमा सिंह, श्रीमती आफरीन एवं श्रीमती अनामिका ने किया। स्वागत भाषण में प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि डीन-साइंस प्रो. हरे कृष्णा ने भारतीय ज्ञान परंपरा के देश के विकास में महत्व को रेखांकित किया।
प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा (भौतिकी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) ने “सतत विकास तथा स्वस्थ जीवन हेतु स्वदेशी तकनीक” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा स्वास्थ्य एवं प्रकृति दोनों के संरक्षण पर आधारित है। उन्होंने भस्म के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
रिसोर्स पर्सन प्रो. अभिनीत श्रीवास्तव (संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विकसित भारत 2047 के लिए उत्प्रेरक सिद्ध होगी। वहीं, दूसरे रिसोर्स पर्सन डॉ. राहुल अरोड़ा (पोस्टडॉक्टरल रिसर्च एसोसिएट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी) ने “न्यूरोडीजेनेरेशन में होस्ट-माइक्रोबायोम अंतःक्रियाओं के लिए आयुर्वेद-सूचना विज्ञान” विषय पर अपने विचार रखे।
द्वितीय तकनीकी सत्र में ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से लगभग 100 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अश्विनी गोयल (पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी, हायर एजुकेशन) ने की। जूरी सदस्यों द्वारा शोध पत्रों का मूल्यांकन किया गया। पोस्टर प्रेजेंटेशन में दीक्षा ने प्रथम, सुनडूस ने द्वितीय एवं अलीना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। ऑफलाइन शोध प्रस्तुति में रूपम पहावा प्रथम, अनुज कुमार त्यागी द्वितीय तथा अरीबा अंसारी तृतीय रहीं।
अंतिम सत्र की अध्यक्षता प्रो. विजय मलिक ने की और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रो. अमिता शर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में सभी संबद्ध समितियों एवं विभागीय सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
