ईरान युद्ध की वजह से 11 महीने बाद बढ़ी घरेलू रसोई गैस की कीमत, जानिए क्या दाम में और होगा इजाफा?
नई दिल्ली। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग के कारण कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़ने के कारण भारत में भी रसोई गैस की कीमतों में इजाफा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। रसोई गैस इसी कच्चे तेल से हासिल होती है। पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस की कीमत में 60 और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपए की बढ़ोतरी की है। अंतरराष्ट्रीय कारणों से रसोई गैस की कीमत में करीब 11 महीने बाद बढ़ोतरी करनी पड़ी है। इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को घरेलू रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी हुई थी।
रसोई गैस से संबंधित खबर ये भी है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने जरूरी चीजों की आपूर्ति से संबंधित कानून एस्मा भी लागू कर दिया है। साथ ही सभी रिफायनरी से कहा है कि वे कच्चे तेल की रिफाइनिंग यानी शोधन के दौरान हासिल होने वाली ब्यूटेन और प्रोपेन गैस सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को मुहैया कराएं। रसोई गैस ब्यूटेन और प्रोपेन को मिलाकर तैयार की जाती है। भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल रूस और खाड़ी से बाहर के अन्य देशों से बड़ी तादाद में मंगा रहा है। जिनको रिफाइन करने से गैस भी मिलेगी और आने वाले दिनों में इसकी कीमत में फिर गिरावट की संभावना बनेगी।
इससे पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया था कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने भी शुक्रवार को बयान जारी कर जनता से पैनिक न करने के लिए कहा। अभी पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई इजाफा नहीं हुआ है। हालांकि, रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी के कारण आम जनता की जेब पर कुछ बोझ जरूर पड़ा है। दरअसल, भारत के पास पेट्रोलियम पदार्थों को बड़े स्तर पर भंडार करने की सुविधा नहीं है। अभी भारत के पास 25 दिन के लिए तैयार पेट्रोलियम उत्पाद और करीब इतने ही दिन का कच्चा तेल है। हालांकि, रूस वगैरा से कच्चे तेल की आपूर्ति तेज होने के कारण भविष्य में संकट न बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
