बिहार में एनडीए सरकार का कील-कांटा दुरुस्त करने में जुटे सीएम नीतीश कुमार, राज्यसभा जाने से पहले की ये तैयारी
पटना। राज्यसभा का सदस्य बनने से पहले सीएम और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार बिहार में सारे कील-कांटे दुरुस्त करने के काम में तेजी से जुटने जा रहे हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा का पर्चा दाखिल करने से पहले बिहार की जनता को भरोसा दिलाया था कि वो राज्य का ध्यान रखेंगे और उनके सीएम न रहने पर भी विकास का काम चलता रहेगा। नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अपने इसी भरोसे की पैठ जनता में बिठाने के लिए समृद्धि यात्रा और प्रगति यात्रा शुरू की है। इन यात्राओं की कड़ी में नीतीश कुमार फिर 10 मार्च से बिहार के दौरे पर निकलने वाले हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार के सीएम नीतीश कुमार अब बिहार के सीमांचल और कोसी इलाके की यात्रा पर निकलेंगे। इस दौरे को सुपौल से शुरू कर नीतीश कुमार मधेपुरा पहुंचेंगे और वहां तीन दिन रहेंगे। मधेपुरा के अलावा नीतीश कुमार सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सहरसा और खगड़िया भी जाएंगे। बिहार के इन सभी जगहों का नीतीश कुमार का दौरा 13 मार्च तक चलेगा। इस दौरान नीतीश कुमार कई विकास योजनाओं की नींव रखने के साथ ही कई प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी करेंगे। जगह-जगह नीतीश कुमार जनता से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान बिहार की नई सरकार के प्रति अपना समर्थन बनाए रखने का भरोसा भी नीतीश कुमार देने वाले हैं। नीतीश कुमार के बारे में पहले ये खबर आई थी कि राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद वो 10 अप्रैल तक बिहार के सीएम पद पर बने रहेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीयू ने ’25 से 30, फिर से नीतीश’ का नारा दिया था। हालांकि, नीतीश कुमार बिहार के सीएम पद पर 20 साल से कुछ ज्यादा रहने वाले हैं। नीतीश कुमार ने बिहार में लालू यादव की जेडीयू के साथ सरकार चलाई, तो बीजेपी के एनडीए गठबंधन के साथ रहकर भी बिहार की सत्ता पर वो काबिज रहे। नीतीश कुमार इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्री भी रहे थे। जिस दौरान रेलवे के उत्थान के लिए नीतीश कुमार ने अहम फैसले किए थे। जब वो पहली बार बिहार के सीएम बने, तो बहुमत न जुटा पाने के कारण सात दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद से कभी नीतीश को पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।
