भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को जोर का झटका, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार किया, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद हैं वकील
नई दिल्ली। भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को मुस्लिम पक्ष को जोर का झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की मेरिट पर टिप्पणी नहीं कर रहा है, लेकिन अभी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई टाली जाए। साथ ही एएसआई सर्वे से संबंधित वीडियो और रंगीन तस्वीरें मस्जिद कमेटी को उपलब्ध कराई जाएं। सलमान खुर्शीद ने कहा कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए मुस्लिम पक्ष को जरूरी वक्त नहीं दिया गया और बिना पूरी सामग्री दिए जल्दबाजी में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सुनवाई करने वाला है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को भरोसा है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सबी आपत्तियों पर उचित तरीके से विचार करेगा। उन्होंने कहा कि कोई शक नहीं कि हाईकोर्ट वीडियोग्राफी को देखेगा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर सभी आपत्तियों पर फैसला करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर किसी पक्ष को शिकायत है, तो वो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट बेंच के सदस्य जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा कि एएसआई सर्वे रिपोर्ट की कुछ आपत्तियां लिस्टेड और कुछ लिस्टेड नहीं हैं। ऐसे में सर्वे का वीडियो हाईकोर्ट में चलाया जाएगा। जहां सभी पक्ष सवाल उठा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि एएसआई सर्वे रिपोर्ट में सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेज सबूत शामिल कर पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर बताकर याचिका दी है। जबकि, मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 16 मार्च को आदेश में कहा था कि जज खुद भोजशाला जाकर देखेंगे। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
