मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के यूपी अध्यक्ष नूर अहमद अजहरी को झटका, भड़काऊ वीडियो मामले में केस रद्द करने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के यूपी अध्यक्ष नूर अहमद अजहरी को झटका देते हुए भड़काऊ वीडियो मामले में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अजहरी पर आरोप है कि एक वीडियो में उन्होंने कहा था कि बीजेपी शासित राज्यों में मुस्लिमों को डराने की कोशिश हो रही है और इन राज्यों ने संविधान को कुचल दिया है। ‘बार एंड बेंच’ की खबर के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने नूर अहमद अजहरी की याचिका पर कहा कि शुरुआती दौर में आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। ये आरोप आपराधिक केस जारी रखने के लिए काफी हैं।
हाईकोर्ट ने पुलिस के आरोप पर गौर किया कि आरोपी की बातें सांप्रदायिक वैमनस्य भड़काकर शांति भंग कर सकती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता अजहरी के खिलाफ दर्ज एफआईआर में बताए गए बयानों पर गौर करने से पता चलता है कि वे एक खास समुदाय के बीच धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले हैं। कोर्ट ने कहा कि अजहरी पर लगे आरोप ये संकेत देते हैं कि ऐसा काम सरकार के लिए नफरत फैलाने के अलावा दंगे और उपद्रव के लिए उकसा सकते हैं। जिससे शांति-व्यवस्था भंग हो सकती है। अजहरी के खिलाफ साल 2023 में पीलीभीत जिले के पूरनपुर थाने में केस दर्ज हुआ था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट के बाद आरोपी को केस का सामना करने के लिए तलब किया था।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि अजहरी ने वीडियो में गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या का मसला उठाया। आरोप है कि वीडियो में कथित तौर पर दावा किया गया कि बीजेपी शासित राज्यों में सरकारें मुस्लिमों को डराने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही ये संकेत दिया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के शासन में अतीक और अशरफ की हत्या की साजिश रची गई। अजहरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में खुद के खिलाफ केस पर याचिका दाखिल की। उन्होंने दलील दी कि सार्वजनिक चर्चा के दौरान विचार रखे थे। वो समुदायों के बीच नफरत नहीं फैलाना चाहते थे। अजहरी ने याचिका में ये आरोप भी लगाया कि निष्पक्ष जांच नहीं हुई और मजिस्ट्रेट ने बिना सबूतों की ठीक से जांच के उनको समन भेजा।
