‘ऐसे फैसले 90 फीसदी राजनीतिक होते हैं’, अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग मामले में बोले नृपेंद्र मिश्र
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के वक्त कारसेवकों पर फायरिंग के मामले में बिना नाम लिए तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार को इसका फैसला लेने का जिम्मेदार बताया है। नृपेंद्र मिश्र ने अयोध्या में मीडिया के सवाल पर कहा कि इस तरह के फैसले प्रधान सचिव स्तर पर नहीं लिए जाते। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी फैसले 90 फीसदी राजनीतिक होते हैं। जबकि, 10 फीसदी गृह सचिव, मुख्य सचिव और डीजीपी की राय होती है।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि अयोध्या में कार सेवा संबंधी फाइल 1992 में सीएम रहे कल्याण सिंह (अब दिवंगत) के सामने रखी गई। इस फाइल में लिखा गया था कि अयोध्या में कानून और व्यवस्था लगभग पूरी तरह चरमरा गई है, तो कल्याण सिंह ने लिखित आदेश जारी किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, गोलियां नहीं चलाई जाएंगी। बता दें कि मुलायम सिंह सरकार और कल्याण सिंह सरकार में नृपेंद्र मिश्र अहम पद संभाल चुके हैं। अब उनके ताजा बयान से बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों को फिर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधने का मौका मिल सकता है।
अयोध्या में राम मंदिर के लिए कारसेवकों की भीड़ अक्टूबर 1990 में अयोध्या में जुटी थी। कुछ कारसेवकों ने तब वहां मौजूद रहे विवादित ढांचे पर चढ़कर उसे नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और यूपी के उस वक्त सीएम रहे मुलायम सिंह यादव पर आरोप लगता रहा है कि उनके आदेश पर 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग की गई। जिसमें तमाम कारसेवकों की जान गई थी। मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में कारसेवकों के जुटने से पहले ये बयान दिया था कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। वहीं, कल्याण सिंह के वक्त जब 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ध्वस्त किया गया, तो किसी भी कारसेवक पर फायरिंग या लाठीचार्ज नहीं हुआ था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल्याण सिंह को एक दिन कैद की सजा भी सुनाई थी।
