विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के जीतने वाले उम्मीदवारों में ज्यादातर मुस्लिम
नई दिल्ली। बीते दिनों चार राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के अलावा केंद्र शासित क्षेत्र पुदुचेरी की विधानसभाओं के चुनाव हुए। इन पांचों जगह हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। सभी जगह कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई है। असम में कांग्रेस के 19 प्रत्याशी जीते हैं। जिनमें से 18 मुस्लिम हैं। उसके एक और उम्मीदवार जयप्रकाश दास जिस नवबचिया सीट से जीते, वो भी मुस्लिम बहुल है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 2 प्रत्याशी विजयी रहे हैं। ये दोनों ही मुस्लिम हैं। वहीं, तमिलनाडु में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करने वाले 5 विधायकों में 1 मुस्लिम है। केरल में कांग्रेस ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ मिलकर चुनाव जीता। आईयूएमएल मुस्लिमों को सामने रखकर सियासत करने वाली पार्टी है। केरल में कांग्रेस के ज्यादातर मुस्लिम प्रत्याशी जीतने के बाद ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने तो ये तक कहा कि कांग्रेस अब ‘मुस्लिम लीग’ बन गई है। कांग्रेस के मुस्लिम लीग बन जाने का आरोप पीएम नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के नेता भी लगातार उठाते हैं।
कांग्रेस इस बार हुए विधानसभा चुनाव में सिर्फ केरल में ही यूडीएफ सरकार बनाने में सफल हुई है। असम में पार्टी को उम्मीद थी कि वो हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को सत्ता से हटा देगी, लेकिन जनता ने कांग्रेस का ये सपना पूरा नहीं होने दिया। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की दुर्गति का सिलसिला अभी थमा नहीं है। तमिलनाडु में उसकी सहयोगी डीएमके को टीवीके चीफ थलापति विजय की सुनामी ने बहा दिया, तो कांग्रेस के भी 28 प्रत्याशियों में से 23 चुनाव हार गए। बीते दिनों कांग्रेस के बड़े नेता और यूपीए सरकार में मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने कहा था कि पार्टी चुनाव नतीजों पर मंथन करेगी। सवाल ये है कि ऐसे मंथन कांग्रेस कई बार कर चुकी, लेकिन मुस्लिम वोट से उसका कैसे भला होगा?
