सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सभी 22 आरोपी बरी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- अभियोजन ठोस सबूत नहीं दे सका
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने चर्चित सोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर मामले में सभी 22 आरोपियों को गुरुवार को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने भी सभी आरोपियों को बरी किया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत नहीं दे सका। इसलिए आरोपियों को दोषी नहीं माना जा सकता। साल 2005 के नवंबर महीने में सोहराबुद्दीन शेख का एनकाउंटर हुआ था। आरोपियों पर सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की हत्या का भी आरोप लगा था। इस मामले में गुजरात पुलिस के कई बड़े अफसर भी घेरे में आए थे।
सोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर का 2006 में तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर से कनेक्शन जोड़ा गया था। तुलसीराम को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस का मुख्य चश्मदीद गवाह माना जाता था। ये आरोप भी लगा था कि तुलसीराम को भी कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया। इस मामले में विशेष अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया था। विशेष अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष सोहराबुद्दीन की हत्या में साजिश या आरोपियों की भूमिका साबित करने में नाकाम रहा। इसके बाद सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों ने साल 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दी थी। वहीं, सीबीआई का कहना था कि वो आरोपियों को बरी करने के खिलाफ अपील नहीं करना चाहती।
सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा था कि केस की सुनवाई में त्रुटि हुई। उन्होंने गवाहों के हवाले से दावा किया कि उनकी गवाही ठीक से ट्रायल कोर्ट ने दर्ज नहीं की थी। सोहराबुद्दीन के भाइयों ने इस मामले में दोबारा सुनवाई की अपील की थी। सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के बाद सीबीआई ने जांच के बाद कहा था कि उसकी पत्नी कौसर बी की भी कुछ दिन बाद हत्या हुई। फिर तुलसीराम प्रजापति को एक अन्य एनकाउंटर में मार दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन मामले की जांच सीबीआई को दी थी और केस की सुनवाई मुंबई के ट्रायल कोर्ट के हवाले किया था। अब सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का रास्ता बचा हुआ है।
