हिंदुओं के कार्तिगई दीपम जलाने के खिलाफ अब तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, पहले डीएमके सरकार ने भी नहीं दी थी मंजूरी
नई दिल्ली। तमिलनाडु में पहले एमके स्टालिन की डीएमके सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर बने दीपाथून पर कार्तिगई दीपम जलाने की मंजूरी नहीं दी थी। अब तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय यानी थलापति विजय की टीवीके सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है। विजय सरकार ने इसी महीने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। याचिका में कार्तिगई दीपम जलाने देने पर चिंता जताई गई है
सी. जोसेफ विजय यानी थलापति विजय की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर बने दीप स्तंभ के पास दरगाह है। इस वजह से कार्तिगई दीपम जलाने के कारण कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिताएं हैं। तमिलनाडु की टीवीके सरकार ने याचिका में कहा है कि इस वजह से कार्तिगई दीपम जलाने की परंपरा को नहीं माना जाना चाहिए। मद्रास हाईकोर्ट के एक जज और फिर दो जज की बेंच ने कार्तिगई दीपम जलाने के पक्ष में फैसला दिया था। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने फैले में कहा था कि भक्त तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर जाकर दीप जला सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ भक्तों के ही जाने की बात मद्रास हाईकोर्ट ने कही थी।
मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तब तमिलनाडु की एमके स्टालिन वाली डीएमके सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। इसी साल फरवरी और जून में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। तमिलनाडु में बीते दिनों विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के नेताओं ने तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम न जलाने का मुद्दा उठाया था। पीएम नरेंद्र मोदी खुद भी तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पहुंचे थे। तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर जहां कार्तिगई दीपम का दीपथून है, वहां पास में सिकंदर बादशाह दरगाह भी है। मुस्लिम इस जगह को अपना बताते हैं। अब सी. जोसेफ विजय की सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के कदम पर नजर है। अगर सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर हस्तक्षेप से इनकार कर देता है, तो तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर प्राचीन परंपरा के मुताबिक हिंदू फिर कार्तिगई दीपम जला सकेंगे।
