सेवा ही जीवन का मूल उद्देश्य : साध्वी उर्मिल दास
नरेंद्र बंसल –
चंबा/हिमाचल प्रदेश। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की तहसील सलूनी स्थित गांव कालीछड़ के निकट श्री हनुमत धाम आश्रम में पूज्य साध्वी उर्मिल दास ने कहा कि मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य धर्म, संस्कृति और संस्कारों की रक्षा करते हुए समाज एवं मानवता की सेवा करना है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता की सेवा, गौ सेवा, संत सेवा, वृद्धजनों की सेवा तथा समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे जरूरतमंद लोगों की सहायता को अपने जीवन का संकल्प बनाना चाहिए। यही सच्चा धर्म और मानवता की सबसे बड़ी पहचान है।
साध्वी उर्मिल दास ने कहा कि भारतीय संस्कृति सेवा, त्याग और करुणा की भावना पर आधारित है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जरूरतमंदों की सहायता करे तो समाज में सुख, शांति और समरसता का वातावरण स्थापित हो सकता है। इस अवसर पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म और संस्कारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने तथा समाजहित के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि पूज्य साध्वी उर्मिल दास, गुरु पूज्य श्री नवल किशोर दास विरक्त संत (बचपन के संत) की शिष्या हैं और वर्तमान में श्री हनुमत धाम आश्रम, कालीछड़, तहसील सलूनी, जिला चंबा (हिमाचल प्रदेश) में धार्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्यों के माध्यम से जनकल्याण का संदेश दे रही हैं।
