कलोल। गुजरात में एक अदालत ने गोहत्या के मामले में सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने प्राचीन ग्रंथों में गाय का महत्व बताते हुए गोहत्या के मामले में जुहापुरा के वसीम कुरैशी, बेहरामपुरा के मोहम्मद रफीक कुरैशी और फतेहवाड़ी के अशफाक बेहलिम को गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) एक्ट और पशु क्रूरता निवारण एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 3-3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट में साबित हुआ कि वसीम, रफीक और अशफाक के पास से 227 किलोग्राम गोमांस बरामद किया गया।
कलोल के एडिशनल सेशन जज बीआर राजपूत ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए प्राचीन ग्रंथों का हवाला दिया और गोरक्षा के सांस्कृतिक महत्व को बताया। कलोल पुलिस ने 22 अगस्त 2024 को जामला गांव में लालाभाई सेनमा के घर छापा मारा था। पुलिस ने वहां गोमांस के साथ तीनों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने गोहत्या के लिए इस्तेमाल हथियार और मांस ले जाने में इस्तेमाल वाहन भी बरामद किया था। बरामद गोमांस की बाजार में कीमत 50 हजार रुपए थी। पुलिस को जांच में पता चला कि वसीम, रफीक और अशफाक इस गोमांस को गुलाम मोईन कुरैशी को बेचने वाले थे।
पुलिस ने गोहत्या के मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन कोर्ट ने तीन को बरी कर दिया। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि गाय को ब्रह्मांड की मां माना जाता है। मानव जीवन और समाज के लिए गाय उपयोगी है। ऐसे में गायों की रक्षा करना धर्म और करुणा का काम है। कोर्ट ने कहा कि जहां भी गोहत्या हो, वहां कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। सबूत से अपराध साबित होने पर दोषी को सख्त सजा देने की बात कहकर कोर्ट ने कहा कि गायों के सांस्कृतिक महत्व को जानने के बाद भी आरोपियों ने एक की हत्या कर मांस बेचने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि अगर सख्त सजा नहीं दी जाएगी, तो गायों के अस्तित्व पर खतरा होगा। गुजरात एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां गोहत्या के लिए उम्रकैद की सजा दी जा सकती है। जबकि, अन्य राज्यों में 7 से 10 साल की सजा का प्रावधान है।
